मॉस्को/नई दिल्ली: पाकिस्तान के चीनी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-35AE खरीदने की चर्चाओं के बीच रूस ने भारत को सीमित संख्या में Sukhoi Su-57 देने के लिए मनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। मॉस्को का कहना है कि अगर पाकिस्तान वायु सेना जल्द ही J-35 को अपने बेड़े में शामिल कर लेती है तो ये विमान भारतीय वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी की क्षमताओं में संभावित कमी को पूरा करने में मदद करेंगे। उसका तर्क है कि Su-57 तब तक एक अंतरिम क्षमता प्रदान करेगा जब तक कि स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) स्टील्थ विमान तैयार नहीं कर लेता है।
भारत का AMCA स्टील्थ लड़ाकू विमान कम से कम 2032-33 से पहले बनकर तैयार नहीं होगा और 2035 के बाद ही मास प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। लेकिन तब तक पाकिस्तान के चीनी जे-35ए और चीनी जे-20 स्टील्थ विमानों का जवाब भारत के पास क्या होगा ये अहम सवाल है? द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक रूस अभी भी भारत को लगभग 40 Su-57 लड़ाकू विमान (मोटे तौर पर दो वायुसेना स्क्वाड्रन) खरीदने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।
क्या भारत रूसी Su-57 लड़ाकू विमान खरीदेगा?
Su-57 को लेकर दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित भारत-रूस रक्षा बैठकों में भी जारी रहीं। ये चर्चाएँ ‘भारत-रूस सैन्य-तकनीकी सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग’ के तहत अभी भी जारी हैं। यह आयोग दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग की देखरेख करने वाला मुख्य द्विपक्षीय तंत्र है। आधिकारिक और उद्योग जगत के सूत्रों से संकेत मिलता है कि इसके बाद इस मंच पर कई स्तरों पर बातचीत हुई है और बातचीत अभी भी चल रही हैं। रूस के प्रस्ताव में दशकों से दोनों देशों के बीच के संबंध का हवाला दिया गया है और उसका कहना है कि वो फ्रांस अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की तुलना में भारत से ज्यादा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एडवांस जानकारियां शेयर करेगा।इनमें संवेदनशील लड़ाकू विमान स्रोत कोड तक पहुंच शामिल है जो ऑन-बोर्ड मिशन सिस्टम, एवियोनिक्स और सेंसर एकीकरण को नियंत्रित करते हैं। चर्चा है कि रूस नासिक स्थित Su-30MKI फैक्ट्री में एसयू-57 का प्रोडक्शन लाइन बनाने के लिए तैयार है। रूस भारत के साथ लाइसेंस के आधार पर विमानों के निर्माण का ऑफर दे रहा है और उसने स्वीकार किया है कि यूक्रेन संघर्ष में रूस की निरंतर भागीदारी और संबंधित प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद भारत अभी भी उसके कुछ प्रमुख रक्षा साझेदारों में से एक है जो गहन सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए खुला है।
रूसी Su-57 लड़ाकू विमान को लेकर दिक्कतें
Su-57 कार्यक्रम को लंबे समय से इंजन विकास में देरी, कम उत्पादन, अनिश्चित स्टील्थ विशेषताओं और लंबे टेस्ट साइकिल को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा इसकी स्टील्थ क्षमताओं पर भी सवाल रहे हैं लेकिन पैंतरेबाजी में ये एफ-35 पर भारी पड़ता है। वहीं अब रूस ने दो इंजन वाले Su-57 का भी फ्लाइट टेस्ट कर लिया है और चर्चा है कि ऐसा भारत के लिए ही किया गया है। भारतीय वायुसेना वर्षों से दो पायलट वाला स्टील्थ जेट चाहती थी। लेकिन Su-57 को शामिल करने से भारतीय वायुसेना के भीतर पहले से मौजूद लॉजिस्टिक चुनौतियां और भी बढ़ जाएंगी।भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही कई तरह के विमान हैं जैसे एंग्लो-फ्रांसीसी जगुआर, मिराज-2000, , सोवियत/रूसी MiG-29 और Su-30MKI, राफेल और स्वदेशी तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट। भारत खुद का AMCA भी बना रहा है। तो अलग अलग तरह के फाइटर जेट होने से इनके रखरखाव में काफी खर्च आता है और अंत में उसका असर बजट पर ही पड़ता है। हर विमान के लिए अलग अलग पूर्जे, अलग इको सिस्टम, अलग रखरखाव और ओवरहॉल इकोसिस्टम लेकिन फिर भी जो जरूरी है और देश की सुरक्षा के लिए जो चाहिए ही चाहिए, वो तो करना ही होगा भले ही कितना भी पैसा क्यों न लगे। पाकिस्तान जब दरिद्र होकर चीनी जे-35 खरीद रहा है तो कम से कम भारत के पास देशहित के लिए बजट की कमी नहीं होनी चाहिए।



