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टोक्यो: जापान ने चीन की बढ़ती ताकत को देखते हुए सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। जापानी डिफेंस मिनिस्टर शिंजिरो कोइजुमी ने कहा है कि देश को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना होगा क्योंकि चीन गंभीर रणनीतिक चुनौती बन गया है। कोइजुमी ने कहा कि जापान को क्षेत्रीय सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाते हुए ऐसी रक्षा नीति अपनानी चाहिए, जो अमेरिका से ज्यादा स्वतंत्र हो। उन्होंने अमेरिका पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया है और दूसरे विश्व युद्ध के बाद संविधान में संसोधन का संकेत दिया है।

बीबीसी को दिए इंटरव्यू में शिंजिरो कोइजुमी ने जापान की रक्षा क्षमता पर यह बातें कही हैं। उनकी ओर से यह बातें ऐसे समय कही गई हैं, जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना अपनी प्राथमिकता बनाया है। जापान ने हथियारों के निर्यात पर लगी रोक हटाई है। हथियार सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं और सैन्य साझेदारियां बढ़ाई हैं।

‘युद्ध रोकने के लिए बढ़ानी होगी ताकत’

कोइजुमी ने कहा, ‘जापान की सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिशें अमेरिका के साथ गठबंधन मजबूत करने और समान सोच वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे बहु-स्तरीय प्रतिरोध बनाया जा सकेगा, जो इस क्षेत्र में किसी नए युद्ध को रोकने के लिए जरूरी है। ऐसा करना आज वक्त की बड़ी जरूरत है।’

तकाइची या कोइजुमी ने सीधे नाम नहीं लिया है लेकिन कई रक्षा एक्सपर्ट का मानना है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रवैये की वजह से जापान का रुख बदला है। ट्रंप ने अपने पुराने सहयोगियों और साझेदारों पर निशाना साधा है, जबकि चीन और रूस जैसे विरोधियों को खुश करने की कोशिश की है। इसका असर जापान पर देखा गया है।

अमेरिका-जापान के करीबी संबंध

संधि के तहत सहयोगी होने के नाते अमेरिका और जापान के बीच लंबे समय से बहुत करीबी सुरक्षा संबंध रहे हैं। जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में अमेरिका की अहम भूमिका रही है। ट्रंप के हालिया रवैये ने जापान को अपनी सोच पर विचार करने के लिए मजबूर किया है। जापान कुछ सालों से अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है।जापान ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद शांतिवादी संविधान अपनाया और युद्ध का अधिकार छोड़ दिया। औपचारिक रूप से जापान के पास सेना नहीं बल्कि सेल्फ-डिफेंस फोर्स (आत्मरक्षा बल) है। जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा में अमेरिका की अहम भूमिका रही है। जापान में हजारों अमेरिकी सैनिक, युद्धपोतों और सैन्य विमानों का बेड़ा तैनात है।

‘अपने देश की रक्षा खुद करेंगे’

कोइजुमी ने कहा है कि जापान क्षेत्रीय सुरक्षा में सिर्फ अमेरिका के साथ अपने रिश्तों के जरिए ही नहीं बल्कि अपनी आजाद भूमिका के जरिए योगदान दे सकता है। यह हमारा देश है और हमें इसकी रक्षा करनी है। हथियारों के निर्यात से रोक हटाने पर कोइजुमी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने जापानी युद्धपोतों को चुना है।

जापान की मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स के इस्तेमाल किए गए युद्धपोत के लिए फिलीपींस के साथ बातचीत चल रही है। जापान की इंडोनेशिया से बातचीत हो रही है और न्यूजीलैंड ने जापानी डिस्ट्रॉयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में यह कुछ ऐसा हो रहा है, जो पहले कभी नहीं देखा गया है।

’81 साल बाद रक्षा नीति में बदलाव’

रक्षा नीति में बदलाव पर कोइजुमी ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 9 में बदलाव का समर्थन करते हैं। यह अनुच्छेद देश को शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध करता है, युद्ध के अधिकार को त्यागता है और अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बल प्रयोग को नकारता है।

कोइजुमी ने आगे कहा, ‘रक्षा मंत्री के बजाय संसद सदस्य के तौर पर कहूं तो जापान ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद (81 साल से) अपने संविधान में कोई संशोधन नहीं किया है। सुरक्षा के माहौल में बदलावों को देखते हुए जापान को शांति बनाए रखनी है तो हमें इन बदलावों के हिसाब से ढलना होगा।’