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मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव ने भाजपा के लिए सिर्फ एक विधानसभा सीट का मुकाबला नहीं है। इसने अब संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता की परीक्षा का रूप ले लिया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद पार्टी के भीतर विरोध, प्रदर्शन और असंतोष सामने आया था।

अब मतदान से पहले भाजपा नेतृत्व हर नेता और कार्यकर्ता की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव खत्म होने के बाद संगठन की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।

भाजपा ने शुरू की अंदरूनी समीक्षा

  • पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि कौन नेता और कार्यकर्ता अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय हैं और कौन निष्क्रिय या संगठन की लाइन से अलग भूमिका निभा रहा है। स्थानीय फीडबैक के साथ संगठन स्तर पर भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
  • चुनाव परिणाम के बाद इन रिपोर्टों की समीक्षा होगी और यदि किसी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप प्रमाणित हुए तो कार्रवाई की जा सकती है। इसमें निलंबन या पार्टी से निष्कासन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
  • जीतू पटवारी के बयान पर चुनाव आयोग पहुंची भाजपा

    • उपचुनाव के प्रचार के अंतिम चरण में भाजपा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। भाजपा के निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग ने आरोप लगाया कि पटवारी ने चुनावी सभाओं में भड़काऊ और आधारहीन बयान दिए।
  • शिकायत में उनके उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर पैसे और शराब बांटने के आरोप लगाए थे। भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई और प्रचार अवधि के दौरान पटवारी को दतिया से बाहर करने की मांग की है।
  • मतदान से पहले प्रशासन की सख्ती

    30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर चार चिन्हित असामाजिक तत्वों को मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम-1990 के तहत जिलाबदर किया गया है। प्रशासन का कहना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    कांग्रेस ने युवा नेताओं पर लगाया दांव

    • दूसरी ओर कांग्रेस ने इस उपचुनाव में युवा नेतृत्व को आगे रखा है। पार्टी का फोकस रोजगार, भर्ती परीक्षाओं में देरी और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के साथ जयवर्धन सिंह, सचिन यादव, प्रियव्रत सिंह और सिद्धार्थ कुशवाह जैसे नेता लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सकता है।
    • दतिया उपचुनाव अब केवल जीत-हार का मुकाबला नहीं रह गया है। यह चुनाव भाजपा के लिए संगठनात्मक अनुशासन और कांग्रेस के लिए जनसंपर्क रणनीति की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।