भोपाल। राजधानी स्थित शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों को लेकर विवाद गहरा गया है।
चयन प्रक्रिया को नियम-विरुद्ध और अवैध बताते हुए कुछ योग्य चिकित्सकों ने राज्यपाल के समक्ष न्याय याचिका दायर कर मामले की जांच और भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उच्च शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियों के लिए संवैधानिक संस्था मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है।
उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी (सेडमैप) के माध्यम से भर्ती कर पसंदीदा लोगों को "बैकडोर एंट्री" देने की कोशिश की जा रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों और स्थापित भर्ती नियमों की भावना के विपरीत है।
राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के नियमों की अनदेखी का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के बावजूद इतने महत्वपूर्ण शैक्षणिक पदों की भर्ती किसी मैनपावर एजेंसी को सौंपना गंभीर अनियमितता है। उनका आरोप है कि इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
पहले भी सामने आ चुका है विवाद
शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि यह संस्थान पहले भी विवादों में रहा है। आरोप है कि पूर्व में बिना विज्ञापन और प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के केवल आंतरिक समिति के माध्यम से 22 पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। उस समय कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. एस.के. मिश्रा पर अपने परिजनों और कुछ प्रोफेसरों के रिश्तेदारों को नियुक्त करने के आरोप लगे थे।



