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होशंगाबाद रोड स्थित विद्या नगर में 20000 वर्ग फीट के सेमी कमर्शियल (रेसीडेंशियल कम कमर्शियल) प्लॉट पर दस मंजिल शॉपिंग मॉल की अनुमति जारी हो गई। यहां केवल ग्राउंड फ्लोर पर ही कमर्शियल अनुमति दी जा सकती थी। इसके अलावा कोलार के दानिश कुंज इलाके में पार्क के लिए आरक्षित डेढ़ एकड़ जमीन पर स्कूल बनाने की अनुमति दे दी गई। यह दोनो‌ं बिल्डिंग परमिशन 31 मार्च से 2 मई के बीच जारी की गई। इस दौरान चीफ सिटी प्लानर अनूप गोयल अवकाश पर थे और असिस्टेंट इंजीनियर लालजी सिंह चौहान के पास उनका प्रभार था।

छुट्टी से लौटने पर गोयल को जब जानकारी मिली तो उन्होंने मामले की जांच कराई। जांच के आधार पर नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने चौहान के निलंबन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा। चौहान राज्य नगरीय यांत्रिकी सेवा कैडर के इंजीनियर हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई का अधिकार राज्य शासन को है। नगरीय विकास विभाग के अपर आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने चौहान को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

पार्किंग के लिए तीन और कमर्शियल के लिए पांच फ्लोर

तय नियमों के मुताबिक विद्या नगर फेज-2 में 100 फीट बाय 200 फीट के रेसीडेंशियल कम कमर्शियल प्लॉट पर 1.25 एफएआर के साथ ग्राउंड फ्लोर पर कमर्शियल अनुमति दी जा सकती थी। लेकिन लालजी सिंह चौहान ने प्रभारी रहते हुए इस पर जो परमिशन जारी की उसमें पार्किंग के लिए तीन फ्लोर बेसमेंट और 5 फ्लोर कमर्शियल के साथ यूटिलिटी फ्लोर मिलाकर कुल 10 फ्लोर की अनुमति दे दी। रिकॉर्ड पर इसमें एफएआर 2 दर्शाया गया है, लेकिन नक्शा बताता है कि जितनी अनुमति दी गई उसमें एफएआर 4 के करीब होना चाहिए। इस तरह की अनियमितता पाए जाने के बाद लालजी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

दो बार नामंजूर हो चुकी थी स्कूल निर्माण की फाइल कोलार के दानिश कुंज इलाके में पार्क के लिए आरक्षित 1.5 एकड़ जमीन पर स्कूल निर्माण की फाइल दो बार निरस्त हो चुकी थी। लेकिन चौहान ने इसे मंजूरी दे दी। बताया जाता है कि कॉलोनी के ले आउट में तो यह ओपन लैंड ही है, लेकिन पुरानी तारीख में पंचायत से यहां स्कूल की अनुमति का एक कागज पेश किया गया। करीब 20 साल पहले कोलार इलाके की पंचायतों को भंग करके नगरपालिका गठित की गई थी और दस साल पहले नगरपालिका को नगर निगम में विलय किया जा चुका है।

घोटालों के कारण चर्चा में ही रहती है शाखा नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा घोटालों के कारण अक्सर चर्चा में रहती है। प्राइवेट आर्किटेक्ट द्वारा रोक के बावजूद कमर्शियल परमिशन देने और अवैध कालोनियों में परमिशन देने के मामले सामने आने पर पिछले साल कई लाइसेंस निरस्त हुए थे।

शहर में अवैध निर्माण की एक बड़ी वजह बिल्डिंग परमिशन शाखा के इंजीनियरों की अनदेखी भी है। साल 2017 में फर्जी कंपलिशन सर्टिफिकेट का एक घोटाला सामने आया था। इसमें अधूरी बनी कालोनियों को भी कंपलिशन सर्टिफिकेट जारी हो गए थे। इस मामले में जिन इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई थी उनमें लालजी सिंह चौहान भी शामिल थे।