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मास्‍को/नई दिल्‍ली/कीव: भारत और रूस के बीच दोस्‍ती सोवियत जमाने से ही दुनिया में एक मिसाल है। साल 1971 का बांग्‍लादेश युद्ध हो या भारत का परमाणु विस्‍फोट, रूस भारत के साथ हमेशा खड़ा रहा। आज भी भारत के करीब 65 फीसदी हथियार रूसी मूल के हैं। अब यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस जंग में बुरी तरह से फंस गया है और लाखों की तादाद में रूसी सैनिक हताहत हुए हैं। रूस के लिए महासंकट की इस घड़ी में भारत ने रूस का पुराना कर्ज एक तरह से उतार दिया है। भारत अमेरिका के 100 फीसदी टैरिफ के खतरे के बाद भी न केवल रूस से जमकर तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे ऐसे 50 हजार बेहद जरूरी सामानों का भी निर्यात कर रहा है जो उसे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से नहीं मिल पा रहे हैं।

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक रूस की रक्षा और सुरक्षा कंपनियां भारत के सप्‍लाई चेन की मदद से हजारों ऐसे सुरक्षा से जुड़े सामानों का आयात कर रही हैं। रिपोर्ट में एक शोध के हवाले से यह भी चेतावनी दी गई है कि भारत और ब्रिटेन तथा यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील के बाद ऐसे सुरक्षा से जुड़े उपकरणों का रूस को निर्यात बढ़ सकता है। इस शोध को करने वाली कंपनी Strider Technologies के मुख्‍य खुफिया अधिकारी डेव‍िड व‍िगनेअल्‍ट ने यह दावा किया है।

भारत और रूस दोस्‍ती दशकों पुरानी

स्‍ट्राइडर कंपनी के शोधकर्ताओं ने 50 हजार कंट्रोल्‍ड या संवेदनशील सामनों को तीसरे देशों में ट्रैक किया जो यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद भारत के रास्‍ते रूस जा रहा है। कंपनी का कहना है कि ये यूरोप में बने सामान हैं जो भारत के रास्‍ते रूस जा रहे हैं। इन सामानों के बारे में पहली बार खुलासा हुआ है। इन सामानों में इलेक्‍ट्रानिक, मशीनरी, ट्रांसपोर्ट के सामान, मेटल और अत्‍याधुनिक इलेक्ट्रिकल उपकरण शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन सामानों में कई तो दोहरे इस्‍तेमाल वाले हैं या संवेदनशील उपकरण माने जाते हैं।इस शोध में दावा क‍िया गया है क‍ि यूरोप या ब्रिटेन के सामानों को भारत में असेंबल करके उसे रूस भेजे जाने का खतरा है। यूरोप के देशों ने रूस के खिलाफ कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। इससे रूस यूरोपीय देशों की तकनीक और उपकरणों को हासिल करने में मुश्किल का सामना कर रहा है। यूरोपीय कंपनी कुछ भी कहे भारत और रूस के बीच संबंध सोव‍ियत जमाने से ही बहुत ही अच्‍छे रहे हैं। भारत रूस का सबसे बड़ा हथियार खरीदने वाला देश है। रूस ने भारत की कई बार मदद की है। रूस भारत को ऐसे हथियार और तकनीक देता है जो पश्चिमी देश भारत को नहीं देते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परमाणु पनडुब्‍बी है। रूस ने भारत को चक्र परमाणु पनडुब्‍बी लीज पर दी थी।

भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा अमेरिका

व‍िश्‍लेषकों का कहना है कि अब भारत भी रूस की मदद कर उसका कर्ज उतार रहा है। भारत के इस रुख से पश्चिमी देश भड़के हुए हैं। अमेरिका में तो सीनेट में बिल पेश हुआ है जिसमें कहा गया है कि रूस से तेल आयात करने वाले भारत और चीन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है। कई एक्‍सपर्ट का कहना है कि मेक इन इंडिया नीति की वजह से भारत अब इतना बड़ा ग्‍लोबल सोर्सिंग का हब बन गया है जिसका यूरोपीय देशों के पास भी व‍िकल्‍प नहीं है। भारत और रूस के बीच अब कुल व्‍यापार करीब 70 अरब डॉलर पहुंच गया है। भारत और रूस इसे साल 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारत और रूस के बीच व्‍यापार अभी और बढ़ने जा रहा है।