वॉशिंगटन: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कहना है कि भारत सीमापार आतंकवाद (पाकिस्तान से) के बड़े खतरे का सामना कर रहा है। भारत के सहयोगियों का इन चिंताओं पर ध्यान ना देना द्विपक्षीय संबंधों पर असर डालती है। जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-अमेरिका संबंधों के सवाल पर ये बात कही है। यह पाकिस्तान के साथ जुड़ाव पर अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को मैसेज देने की कोशिश है। पाकिस्तान के साथ बीते कुछ समय में अमेरिका ने अपने संबंधों को तेजी से सुधारा है। जयशंकर ने अमेरिका और दुनिया का विदेश नीति में दिखावा खत्म हो जाने की बात कही है।
न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देश से फैलने वाला आतंकवाद भारत की सुरक्षा से जुड़ी मुख्य चिंताओं में से है। बहुत कम देश ऐसे हैं, जिन्हें किसी पड़ोसी देश से उस तरह के आतंकवाद का सामना करना पड़ा है, जैसा हमने किया है। अगर हमारा कोई सहयोगी (यूएस) हमारी इस मुख्य चिंता को नहीं समझता है तो जाहिर है कि इसका असर हमारे रिश्तों पर पड़ता है।
‘अमेरिका का दिखावा खत्म’
डॉक्टर जयशंकर ने इस दौरान कहा, ‘अमेरिका में एक समय ऐसी सोच थी कि उन्हें भारत के पास बहुत सारे विकल्प पसंद नहीं थे। अमेरिकी चाहते थे कि भारत हमारे साथ संबंधों पर ध्यान दें, जबकि अमेरिका ने खुद अपने विकल्प खुले रखे थे। आज वह सब खत्म हो गया है। अब दुनिया के देश खुलकर एक-दूसरे से बात कर रहे हैं।’
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका ने व्यापार का एक नया तरीका अपनाया है। यह तरीका वन-टू-वन डील है यानी हर चीज पर फिर से बातचीत। हर कोई खुलकर एक-दूसरे के साथ डील कर रहा है। विदेश मंत्री ने इस दौरान साफ कहा कि हम आज मल्टीपोलैरिटी (बहु-ध्रुवीयता) की ओर बढ़ रहे हैं।
कैसे सुधरेंगे भारत-अमेरिका संबंध
भारत-अमेरिका संबंधों और टैरिफ पर मतभेदों के बीच साझेदारी को बेहतर करने के तरीके पर हुए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि इन रिश्तों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। एक मुद्दा दोनों देशों की संवेदनशीलता से जुड़ा है। भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बहुत अहम है। भारत को दशकों से पड़ोसी देश की सोची-समझी नीति के तहत आतंकवाद का सामना करना पड़ा है।
जयशंकर ने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ उसके संबंध ऊंचाई की ओर बढ़ें। हम निश्चित रूप से उम्मीद करते हैं कि रिश्ते ऊंचाई की ओर बढ़ेंगे लेकिन हमें उन मुद्दों के बारे में यथार्थवादी होना होगा, जिनका हम सामना कर रहे हैं। अगर हम इनमें से कुछ मुद्दों पर आगे बढ़ पाते हैं, तो मुझे लगता है कि हमारे रिश्ते बेहतर होंगे।
- दुनिया के मुश्किल हालात, जिसमें कई टकराव और 4F (खाना, ईंधन, खाद और फाइनेंस) का संकट शामिल है।
- जबरदस्त होड़ और गहरी आपसी निर्भरता का विरोधाभास।
- हालात की अविभाज्यता के लिए एकजुट नजरिए की जरूरत है।
- मौजूदा उथल-पुथल की कई वजहें हैं।
- मल्टीपोलैरिटी (बहुध्रुवीयता) का अपरिहार्य होना।



