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वॉशिंगटन/ढाका: शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव के बीच अमेरिका ने अहम बयान दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने गुरुवार को एक बयान दिया जिससे पता चलता है कि वॉशिंगटन ने यह मामला भारत और बांग्लादेश के बीच छोड़ दिया है। ट्रंप प्रशासन का इस मामले में हस्तक्षेप का कोई इरादा नहीं है। विदेश विभाग के अधिकारी ने उम्मीद जताई कि दिल्ली में रहीं शेख से जुड़े मुद्दे को बांग्लादेश और भारत सुलझा लेंगे।

न्यूयॉर्क में UNGA की बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने दक्षिण एशिया की नीति को लेकर ब्रीफिंग की थी। इसी दौरान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग को लेकर सवाल पूछा गया। पत्रकारों ने विदेश विभाग के अधिकारी से शेख हसीना के बारे में अमेरिकी रुख को लेकर सवाल किया, जिस पर अधिकारी ने कहा कि वॉशिंगटन ने इस मामले पर कोई औपचारिक रुख नहीं अपनाया है।

शेख हसीना को लेकर क्या कहा?

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से दिल्ली में रह रही हैं। तत्कालीन छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा था। शेख हसीना पर उनकी गैर-मौजदूगी में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया और दोषी पाया गया। उन्हें बांग्लादेश में मौत की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उनकी पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भारत से शेख हसीना को सौंपे जाने की मांग कर रही है।

अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "हम समझते हैं कि यह मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बन गया है। हमें उम्मीद है कि वे आपस में चर्चा करेंगे और किसी समाधान तक पहुंचेंगे।" अधिकारी ने आगे संकेत दिया कि वॉशिंगटन ने इस मुद्दे को दोनों देशों पर ही छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि "हसीना के साथ क्या होना चाहिए,इस बारे में हमने अभी तक कुछ तय नहीं किया है।"

अवामी लीग पर बैन को लेकर दोहरा रवैया

अवामी लीग की गतिविधियों के रोक को लेकर सवाल पर उन्होंने इसे बांग्लादेश का अंदरूनी मामला बताया। अधिकारी ने कहा, "मैं बांग्लादेश की घरेलू राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।" इसके साथ ही यह भी कहा कि मौजूदा BNP सरकार के साथ संबंध बहुत अच्छे हैं और अमेरिका बांग्लादेश की चुनी हुई सरकार के साथ काम जारी रखने को इच्छुक है। अधिकारी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि बांग्लादेश की अंदरूनी राजनीति पर टिप्पणी करना उचित है।

दुनिया भर को लोकतंत्र का ज्ञान देने वाले अमेरिकी अधिकारी ने अवामी लीग की राजनीतिक आजादी को रोकने पर कुछ नहीं कहा और न ही बीएनपी सरकार से नरमी बरतने की अपील की। इससे साफ तौर पर BNP का हौसला बढ़ेगा। साथ ही अवामी लीग के समर्थकों को निराशा होगी, जो पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।