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नई दिल्ली: गौतम अडानी की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड अपना कर्ज चुकाने के लिए दुनिया के कई बड़े बैंकों से लोन लेगी। इसके लिए बैंक तैयार भी हो गए हैं। कंपनी ने वैश्विक ऋणदाताओं के एक समूह से लगभग 250 मिलियन डॉलर (करीब 2200 करोड़ रुपये) जुटाने के लिए एक सौदा किया है। यह सौदा अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद कंपनी की पहली विदेशी मुद्रा ऋण है। इस डील के साथ अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर में मंगलवार को तेजी आ गई।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक जिन बैंकों ने अडानी की इस कंपनी को लोन देने पर सहमति जताई है, उनमें डीबीएस बैंक लिमिटेड, डीजेड बैंक, राबोबैंक और बैंक सिनोपैक कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। कंपनी इस लोन की रकम का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए करेगी। सिर्फ अडानी ही नहीं, मुकेश अंबानी भी इस तरह का लोन ले चुके हैं। उन्होंने कुछ महीने पहले ही 25 हजार करोड़ रुपये का विदेशी लोन लिया था।

5 साल के लिए मिलेगा लोन

अडानी की कंपनी को दिए गए लोन की अवधि पांच साल से अधिक है और ब्याज दर लगभग 8.20% होगी। यह लोन वित्तपोषण नवीकरणीय ऊर्जा इकाई के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समूह अगले पांच वर्षों में अपने कर्ज को कम करने का लक्ष्य बना रहा है। कंपनी की साल 2027 तक अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में बॉन्ड जारी करने की कोई योजना नहीं है। मार्च में अडानी ग्रीन ने भारत की पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ करीब 1 अरब डॉलर का कंस्ट्रक्शन लिंक्ड लोन रीफाइनेंस कराया था।

10 अरब डॉलर से ज्यादा लोन

एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स की अगस्त की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली छमाही में अडानी ग्रुप ने अपने बंदरगाहों, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड सहित विभिन्न इकाइयों के लिए 10 अरब डॉलर से अधिक का लोन लिया है।