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नई दिल्ली: सर्दियों में ठंड बढ़ने के साथ सांस की बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ जाता है। देश के 245 अस्पतालों में किए गए अध्ययन में सामने आया है कि सांस की बीमारियों से हुई कुल मौतों में करीब एक तिहाई सर्दियों में दर्ज की गईं। अध्ययन में शामिल 394 मौतों में से 32.7% सर्दियों में हुईं, जबकि गर्मियों में यह आंकड़ा 18% रहा। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की हिस्सेदारी भी अधिक रही।

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के अध्ययन में 245 केंद्रों पर सांस की बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती हुए 2,886 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अलग-अलग मौसम में मरीजों के अस्पताल पहुंचने और मौत के आंकड़ों की तुलना की गई। सर्दियों में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की हिस्सेदारी 28.7% थी, जबकि गर्मियों में यह 21.1% रही।

  • 245 अस्पतालों की स्टडी में खुलासा
  • सर्दियों में 32.7% मौतें, गर्मियों में यह आंकड़ा 18% रहा
  • सीओपीडी मरीजों में सर्दियों के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 39% अधिक पाई गई

फेफड़ों के रोगियों को खतरा ज्यादा

अध्ययन में सीओपीडी को अस्पताल में भर्ती होने और मौत का प्रमुख कारण पाया गया। यह फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें सास लेने में परेशानी होती है। सर्दियों में इस कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 39% अधिक थी।

टीबी और अस्थमा के मरीज भी प्रभावित

अध्ययन में टीबी, सांस की नलियों में संक्रमण, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों के मरीज भी शामिल थे।

सर्दियों में बढ़ जाती है अस्पतालों की चुनौती

सर्दियों में सांस के मरीजों की बढ़ती संख्या अस्पतालों के लिए चुनौती है। अस्पतालों को इसके लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।