अंटार्कटिका: साल 1957 में अंटार्कटिका के पास दूर-दराज स्थित करगुएलेन द्वीप पर सिर्फ एक नर और एक मादा मौफ्लॉन यानि जंगली भेड़ों को छोड़ा गया था। जीव विज्ञान के स्थापित नियमों के मुताबिक इतने छोटे समूह से शुरू हुई आबादी में समय के साथ आनुवंशिक विविधता घटकर खत्म हो जानी चाहिए थी। लेकिन 46 साल बाद जब वैज्ञानिकों ने इस द्वीप पर पल रहे 700 भेड़ों के झुंड का DNA टेस्ट किया तो नतीजे हैरान कर देने वाले थे।
‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी’ में प्रकाशित इस ऐतिहासिक रिसर्च के मुताबिक बाहरी संपर्क से पूरी तरह अलग-थलग रहने के बावजूद इन भेड़ों की जेनेटिक वेरायटी कम होने के बजाय बढ़ गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अनोखे चमत्कार के पीछे कुदरत की ‘बैलेंसिंग सिलेक्शन’ प्रक्रिया और इस आबादी में पाई जाने वाली 33.8% जुड़वां बच्चे पैदा करने की दर है। इस खोज ने दुनिया भर के आनुवंशिकी विदों और जनसंख्या मॉडल को पूरी तरह से चौंका दिया है।
पेरिस से करगुएलेन द्वीप पर छोड़े गये थे दो भेड़
रिपोर्ट के मुताबिक पेरिस के विन्सेन्स चिड़ियाघर से कॉर्सिकन मौफ्लॉन की एक नर और एक मादा जो सिर्फ एक साल के थे उन्हें लाकर हॉट आइलैंड पर छोड़ा गया था। यह द्वीप 6.5 वर्ग किलोमीटर का इलाका है जो रियूनियन से लगभग 3,000 किलोमीटर दूर है। रियूनियन वह जगह है जहां से पोर्ट-ऑक्स-फ्रेंकोइस में मौजूद रिसर्च बेस के लिए सप्लाई जहाज रवाना होते हैं। उस समय इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को यह अंदाजा नहीं था कि यह जोड़ा आगे चलकर पॉपुलेशन जेनेटिक्स यानि आबादी से जुड़े आनुवंशिकी विज्ञान की एक जानी-मानी धारणा को चुनौती देगा।
समय के साथ इनकी आबादी में उतार-चढ़ाव आते रहे लेकिन संख्या 700 से ज्यादा तक पहुंच गई। इसके बाद संख्या तेजी से घटी और आगे भी घटती-बढ़ती रही। इसके अलावा हर दो से पांच साल में बड़ी संख्या में इनकी मौतें भी होती रहीं। दशकों बाद जब जीव-वैज्ञानिकों ने इस झुंड पर ध्यान दिया तब तक यह पूरी तरह से जंगली झुंड बन चुका था और इसमें शामिल सभी जानवर उन्हीं दो मूल जानवरों की संतानें थीं।
रिसर्चर्स ने 46 सालों में हुए जेनेटिक बदलावों का पता लगाया
इस लंबे इतिहास का मतलब था कि हॉट आइलैंड स्टडी के मकसद से एक अनोखी बायोलॉजिकल लैब थी। 1957 और 2003 के बीच हॉट आइलैंड पर मौफ्लॉन से लिए गए टिश्यू सैंपल ने 46 सालों का जेनेटिक डेटा दिया। यह डेटा उन जानवरों की आबादी से मिला था जो बहुत कम संख्या में जानवरों से शुरू हुई थी। न सैंपल का एनालिसिस काउफर आर., कोल्टमैन डी.डब्ल्यू., चैपुइस जे-एल., पोंटियर डी., और रेले डी. ने अपने आर्टिकल में लिखा है।



