Spread the love

सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला IPS अधिकारी को अपने पूर्व पति और ससुराल वालों से बिना शर्त माफी मांगने का आदेश दिया। अधिकारी ने वैवाहिक विवाद में पति और ससुराल वालों के खिलाफ कई झूठे क्रिमिनल केस दर्ज कराए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी मामलों को भी रद्द कर दिया।

CJI बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा, ‘मुकदमों की वजह से पति को 109 दिन और उसके पिता को 103 दिन जेल में बिताने पड़े। उन्होंने जो कुछ सहा, उसकी किसी भी तरह से भरपाई नहीं की जा सकती।’

सोशल मीडिया पर अपलोड करना होगा माफीनामा 

कोर्ट ने आदेश दिया कि महिला और उसके माता-पिता पीड़ित पति और उसके परिवार के सदस्यों से बिना शर्त माफी मांगें। माफीनामा अंग्रेजी और हिंदी के एक-एक प्रसिद्ध अखबार के राष्ट्रीय संस्करण में छपवाना होगा।

साथ ही माफीनामा 3 दिनों के भीतर फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित करना होगा। कोर्ट ने 2018 से अलग रह रहे इस जोड़े के तलाक की अर्जी भी मंजूर कर ली और बेटी की कस्टडी मां (महिला IPS अधिकारी) को सौंप दी। महिला का पूर्व पति और परिवार के सदस्य बेटी से मिल सकेंगे।

क्रिमिनल, तलाक और भरण-पोषण केस दायर किए थे 

महिला अधिकारी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ क्रिमिनल केस, तलाक और भरण-पोषण के लिए फैमिली कोर्ट में मुकदमे दायर किए थे। उसके पति ने भी जवाबी मामले दर्ज कराए थे।

इसके अलावा थर्ड पार्टी ने भी मामले दर्ज किए गए थे। पति-पत्नी दोनों ने मामलों को अपने-अपने निवास क्षेत्रों में ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।