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पटना: राज्यसभा के चुनाव से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) अपने उम्मीदवार के लिए बैटिंग करने से क्यों पीछे हटी? वह भी तब जब लोजपा (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान आज भी पीएम नरेंद्र मोदी के ‘हनुमान’ बने हुए हैं। और यह मजबूत बॉन्डिंग आज भी दिखती है। रही बात वादे की तो यह वादा भी तो भी तो बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने ही किया था कि चिराग पासवान की पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 29 सीटों पर लड़ें। एक सीट राज्यसभा की ले लें। तो क्या तीन सीटों का जुगाड़ नहीं कर सके चिराग! आखिर ऐसी क्या वजह हुई कि 19 विधायकों वाली पार्टी लोजपा (आर) को समर्थन की राजनीति का लबादा ओढ़ना पड़ा? जानिए क्यों राज्यसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने से पीछे हटी लोजपा (आर)

चिराग पासवान की मां ने क्यों कहा राज्यसभा को ना?

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कम विधानसभा सीटों पर लड़ने पर चिराग पासवान राजी हुए तो तब यही चर्चा थी कि समझौते में एक राज्यसभा की सीट मिलेगी। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के हवाले से यह चर्चा भी थी कि राज्यसभा की एक सीट चिराग पासवान ने अपनी मां के लिए मांग ली है, लेकिन उस वक्त कोई अंतर्विरोध या अनिच्छा जैसी कोई बात भी नहीं हुई थी।

यह तो राज्यसभा चुनाव के ऐन मौके पर यह खबर खुद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दी कि उनकी मां राज्यसभा नहीं जाना चाहती है। कारण भी स्पष्ट चिराग पासवान ने ही किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी मां नहीं चाहती की वे अकारण राजनीति की चर्चा में रहे। उन्हें सक्रिय राजनीति से कोई लगाव नहीं। राज्यसभा जाना ही होता तो पहले ही चली जाती। लेकिन रामविलास पासवान की राजनीति जब चरम पर थी, तब मेरी मां नहीं गई तो अब क्यों नहीं जाएगी?

राज्यसभा के लिए तीन विधायकों का जुगाड़ का संकट तो नहीं!

कहीं ऐसा तो नहीं कि चिराग पासवान को तीन विधायकों के जुगाड़ का संकट था। चिराग पासवान की पार्टी के 19 विधायक हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह थी कि पांचवीं सीट के लिए राजद उम्मीदवार उतारेगा और एआईएमआईएम से बात हो रही है। ऐसे में तीन विधायक का जुगाड़ कैसे करते? जुगाड़ को लेकर एआईएमआईएम और कांग्रेस के विधायक ही टारगेट किए जा सकते थे। फिर तीन विधायक कहां से लाते? दलित राजनीति को देखते बसपा के एक विधायक का समर्थन ऐसे भी नहीं मिलता। तो ले देकर एक आईपी गुप्ता बचते। राजद के उम्मीदवार उतारने के कारण यह बहुत मुश्किल होता।

चिराग पासवान ने क्यों चुना एग्जिट का रास्ता?

एक संभावना थी कि वादा को याद कर जिद्द करते तो किसी धनकुबेर को चुनावी जंग में उतर सकते थे। ऐसे में इन पर टिकट बेचने का आरोप लगता। दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी झेलनी पड़ती। पहले से जीतन राम मांझी से तकरार चल ही रहा है। ऐसे में चिराग पासवान ने एग्जिट का ही रास्ता चुना।

चिराग के आड़े आ रहे जीतन राम मांझी?

एक संकट यह भी था कि राज्यसभा की एक सीट की चाहत हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर को भी थी। हम के संस्थापक अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने तो अपनी तरफ से राज्यसभा की एक सीट की डिमांड कर दी थी। उनकी पार्टी के पांच विधानसभा सदस्य और एक विधान पार्षद हैं। इनमें इमामगंज विधानसभा से दीपा कुमारी (मांझी) बाराचट्टी विधानसभा से ज्योति देवी, अतरी विधानसभा से रोमित कुमार, सिकंदरा विधानसभा से प्रफुल्ल कुमार मांझी और कुटुम्बा विधानसभा से ललन राम विधायक हैं।

ऐसे में अगर चिराग पासवान एक सीट ले भी लेते तो हम के पांच विधायकों का साथ नहीं मिलता तो और भी किरकिरी हो जाती। यह संभावना इसलिए भी बढ़ जाती है कि राज्यसभा चुनाव में कोई व्हिप जारी नहीं होता है। ऐसे में 8 विधायकों का जुगाड़ चिराग के लिए एक कठिन डगर होता।