नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई टाइट हो गई है। इससे भारत में खासकर एलपीजी की काफी दिक्कत हो गई है। पिछले कुछ दिनों से आम लोग इसे लेकर काफी परेशान हैं। भारत एलपीजी के बड़े कंज्यूमर्स में शामिल है लेकिन देश में ज्यादातर गैस बाहर से आती है। हालांकि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देश में एलपीजी के उत्पादन में 36 फीसदी तेजी आई है लेकिन देश में इसकी कुल उपलब्धता अब भी चिंताजनक है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एलपीजी का सबसे ज्यादा उत्पादन किस देश में होता है? इसका जवाब है अमेरिका। दूर-दूर तक कोई देश अमेरिका के साथ मुकाबले में नहीं है।
अमेरिका दुनिया में कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी का भी सबसे बड़ा उत्पादक देश है। एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी हाइड्रोकार्बन गैसों के मिक्सचर होती है। आसान स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के लिए इसे प्रेशर से लिक्विफाइड किया जाता है। दुनिया में एलपीजी का उत्पादन दो तरीकों से होता है। पहला तरीका नेचुरल गैस प्रोसेसिंग का है। जब नेचुरल गैस निकाली जाती है तो इस प्रोसेस के दौरान प्रोपेन और ब्यूटेन को अलग कर दिया जाता है।
अमेरिका में उत्पादन
दूसरा तरीका यह है कि जब कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में रिफाइन किया जाता है तो इस प्रोसेस में एलपीजी बाय-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है। यही वजह है कि जिन देशों में तेल और नेचुरल गैस की मजबूत इंडस्ट्रीज है, वहां एलपीजी का भी काफी उत्पादन होता है। अमेरिका रोजाना 20.8 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है जो कुल ग्लोबल प्रोडक्शन का करीब 20 फीसदी है। उसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा, ईरान, इराक, चीन, यूएई, ब्राजील और कुवैत का नंबर है।अमेरिका दुनिया में एलपीजी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वह हर साल करीब 84 मिलियन टन एलपीजी का उत्पादन करता है। यह कुल वैश्विक उत्पादन का 26% है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि शेल गैस की क्रांति के बाद देश में नेचुरल गैस का उत्पादन बढ़ा है। पर्मियन बेसिन और मार्सेलस शेल में बड़ी मात्रा में प्रोपेन और ब्यूटेन निकाली जाती है। साथ ही अमेरिका में दुनिया की सबसे बेहतरीन रिफाइनिंग फैसिलिटीज हैं जहां भारी मात्रा में एलपीजी प्रोसेस की जाती है।
भारत का हाल
अमेरिका दुनिया के कई देशों को एलपीजी का एक्सपोर्ट करता है। इनमें एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका शामिल हैं। अमेरिका के बाद चीन एलपीजी का दूसरे सबसे बड़ा प्रोड्यूसर है। चीन में हर साल 32 मिलियन टन एलपीजी का उत्पदान होता है। सऊदी अरब में हर साल करीब 26 मिलियन टन एलपीजी का उत्पादन होता है। इस लिस्ट में रूस चौथे नंबर पर है। कनाडा, ईरान, कतर, यूएई और ऑस्ट्रेलियन भी एलपीजी के बड़े उत्पादकों में शामिल हैं।
भारत एलपीजी के बड़े उपभोक्ताओं में शामिल है। लेकिन भारत अपनी जरूरत की ज्यादातर एलपीजी आयात करता है। घरेलू स्तर पर रिफाइनरीज और गैस प्रोसेसिंग प्लांट्स एलपीजी का उत्पादन करती हैं लेकिन यह हमारी मांग को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। ईरान युद्ध के कारण देश में एलपीजी की सप्लाई टाइट हुई है। सरकार ने हाल में एलपीजी की कीमत में बढ़ोतरी की थी और लोगों से पीएनजी की तरफ शिफ्ट होने का आह्वान किया है।



