एकता कपूर का हिट टीवी सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सबसे ज्यादा देखे गए टीवी शोज में से एक था। इसने कई रिकॉर्ड बनाए थे। यह साल 2000 से 2008 तक एशिया में सबसे ज्यादा देखे गए टीवी शोज में से एक रहा। दर्शकों ने तुलसी विरानी और मिहिर की जोड़ी को इतना प्यार दिया कि जब एक एपिसोड में मिहिर की मौत दिखाई गई तो दर्शकों ने बालाजी के ऑफिस के बाहर हंगामा शुरू कर दिया था और मेकर्स को गालियां बकनी शुरू कर दी थीं। मेकर्स के फोन घनघनाने लगे थे। हद तो तब हो गई थी जब मिहिर का रोल निभाने वाले अमर उपाध्याय के घर औरतें सफेद साड़ी पहनकर मातम मनाने पहुंच गई थीं।
अमर उपाध्याय ’क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिहिर के रोल से घर-घर मशहूर हो गए थे। इसीलिए जब मिहिर की मौत दिखाई गई तो अमर उपाध्याय को ढेरों चिट्ठियां और ई-मेल मिले, जिसमें लोग उनकी यानी मिहिर की मौत का मातम मना रहे थे। औरतें सफेद साड़ी में मातम मनाने उनके घर पहुंच गई थीं।
अमर उपाध्याय के घर सफेद साड़ी में पहुंची औरतें, मां ने भगाया
अमर उपाध्याय ने ‘एबीपी लाइव’ को बताया था, ‘डोर बेल बजी तो मैं उठा। मैंने देखा कि 15-20 औरतें मेरे घर के बाहर खड़ी हैं। सभी सफेद साड़ी में थीं। जैसे ही उन्होंने मुझे देखा, तो उन्हें शॉक लगा। मेरी मां ने उनसे सवाल पूछा तो बोलीं कि वो मिहिर की मौत का मातम मनाने आई हैं। मेरी मां को गुस्सा आ गया। उन्होंने उन औरतों को डांटकर भगा दिया।’
अमर उपाध्याय ने सुनाया मिहिर की मौत वाले सीन के बाद का मंजर
अमर उपाध्याय ने ’क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में मिहिर की मौत के बाद हुए हंगामे का भी वाकया सुनाया था। अमर के मुताबिक, उन्हें रात के 2 बजे एकता के ऑफिस जाकर फोन पर लोगों को समझाना पड़ा था कि वह जिंदा हैं। अमर उपाध्याय ने बताया था, ‘एकता ने मिहिर की मौत वाले पूरे एपिसोड को इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था कि जब आखिरकार मौत वाला सीन दिखाया गया, तो हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। जब यह एपिसोड पहली बार टेलिकास्ट हुआ, मुझे याद है कि मेरी मां इसे देखकर रो रही थीं। मैं सोच रहा था कि मैं जिंदा हूं मां और आपके बगल में बैठा हूं।’
अमर उपाध्याय को समझाना पड़ा- मैं जिंदा हूं, मेरा किरदार मरा है
अमर उपाध्याय ने आगे बताया, ‘देर रात मुझे बालाजी टेलीफिल्म्स से फोन आया कि उनके ईमेल सर्वर क्रैश हो गए हैं और टेलीफोन लाइनें जाम हो गई हैं क्योंकि मिहिर की मौत पर भारी हंगामा हो रहा है। मैं रात के दो बजे उनके दफ्तर गया। मैंने फोन कॉल्स अटेंड किए और लोगों को भरोसा दिलाया कि मैं जिंदा हूं और सिर्फ मेरा किरदार ही मरा है। अगले दो दिन इसी में गुजर गए।’



