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सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने रविवार (31 अगस्त) को इंटरनेशनल साइबर ठगी गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह गैंग देश-विदेश के युवाओं को कंप्यूटर जॉब और कॉपी-पेस्ट जैसे आसान काम का झांसा देकर थाईलैंड बुलाता था। इसके बाद उन्हें थाइलैंड से उन्हें म्यांमार भेज दिया जाता था, जहां चीनी गैंग की गैरकानूनी कॉल सेंटरों में अवैध रूप से काम कराया जाता है।

इस मामले में क्राइम टीम ने एक आरोपी को सूरत से और दो को चंडीगढ़ और पंजाब से गिरफ्तार किया था। साइबर सेल की जांच में पता चला है कि पकड़े गए तीन आरोपियों ने म्यांमार और चाइनीज गैंग के साथ मिलकर देश-विदेश के 40 युवकों को म्यांमार में साइबर गुलाम बना रखा है।

इस मामले में  रैकेट के एक्सक्लूसिव वीडियोज मिले हैं। इन वीडियो में म्यांमार में चल रहे चीनी माफिया के सीक्रेट ऑफिस के अंदर और बाहर के दृश्य कैद हैं। यह वही ऑफिस है, जहां बंधक बनाए गए युवकों से कई तरह के साइबर अपराध करवाए जाते हैं। जांच में पता चला है कि इन युवाओं को चीनी गिरोह द्वारा एक प्रोफेशनल कंपनी की तरह साइबर अपराध की ट्रेनिंग दी जाती है।

सूरत की क्राइम और साइबर पुलिस की जांच में सामने आया कि इस गिरोह के प्रमुख आरोपी नीपेंद्र उर्फ नीरव लवकुश चौधरी (उत्तराखंड), प्रीत रसिकभाई कमाणी (राजकोट) और आशीषभाई रमणलाल राणा (सूरत) हैं। इनमें लवकुश चौधरी (एचआर मैनेजर), पंजाब का प्रीत रसिकभाई कमाणी (एजेंट का और सूरत का रहने वाला आशीषभाई रमणलाल राणा वीजा एजेंट की जिम्मेदारी निभाता था।

इन्होंने रैकेट के 11 अन्य सदस्यों के नाम बताए हैं, जिनमें अलेक्जेंडर, एंजो, क्रुणाल, नीलेश पुरोहित, विलियम, किंग, विम, कुम्पेंग, अलोंग, शशांक और स्ट्रॉन्ग शामिल हैं। साइबर ब्रांच देश-विदेश के इन 11 आरोपियों की डिटेल खंगाल रही है।

सोशल मीडिया के जरिए करते थे संपर्क

यह गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम आईडी पर झूठे नामों से संपर्क कर ऑनलाइन निवेश के बहाने फंसाता था। पुलिस ने मामले में 12 प्रमुख मोबाइल और टेलीग्राम आईडी की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल गिरोह द्वारा ऑनलाइन ठगी के लिए किया जाता था। आरोपी पिछले डेढ़ साल से इस इंटरनेशनल गैंग के लिए काम कर रहे थे।

करीब एक महीने पहले सूरत के दो युवकों के विदेश भेजे जाने और बंधक बनाए जाने के मामले में सूरत साइबर क्राइम ब्रांच ने FIR दर्ज की थी। साइबर क्राइम ने आरोपियों की पहचान और पकड़ के लिए तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल्स और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच की और इन तीनों को गिरफ्तार किया था। तीनों आरोपियों ने पूछताछ में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि इस रैकेट का जाल भारत-म्यांमार ही नहीं, बल्कि कई देशों में फैला हुआ है।

अन्य विदेशी युवकों को थाइलैंड से म्यांमार भेजा जाता है, जबकि कुछ भारतीयों को भारत से ही नदी पार करके म्यांमार पहुंचाया गया था। खास बात यह है कि नदी पार करने के बाद म्यांमार आर्मी के जवान ही इन्हें चीनी गैंग के साइबर फ्रॉड कंपनियों तक पहुंचाते हैं। अब तक ऐसे 40 लोगों की जानकारी सामने आई है, जिन्हें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और इथोपिया से भेजा गया। इनमें सबसे ज्यादा गुजरात और हरियाणा के 9-9 लड़के हैं।