ढाका: बांग्लादेश में तारिक रहमान के पीएम बनने के तुरंत बाद एक मेहमान के ढाका दौरे ने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींचा है। यह मेहमान तुर्की प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन के बेटे बिलाल हैं। बिलाल एर्दोगन बुधवार सुबह ‘चुपचाप’ ढाका पहुंचे, जब तारिक रहमान के शपथ समारोह को 24 घंटे भी नहीं बीते थे। बिलाल का पहले से सार्वजनिक जानकारी के बिना हो रहा यह दौरा तुर्की की ढाका में बढ़ती पैठ को दिखाता है। साफ है कि तुर्की नई सरकार में अपना प्रभाव रखना चाहता है।
बांग्लादेश में अगस्त, 2024 में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद से तुर्की ने लगातार ढाका के साथ अपने संबंध बढ़ाए हैं। तुर्की ने खासतौर से बांग्लादेश के दक्षिणपंथी गुटों से अपना संपर्क बढ़ाया। ऐसे में बिलाल के दौरे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर जमात-ए-इस्लामी और कट्टरपंथी गुटों के साथ तुर्की के जुड़ाव को देखते हुए कहा जा रहा है कि बिलाल एक ‘मिशन’ के तहत ढाका में हैं।
बिलाल के ढाका में कार्यक्रम
बिलाल एर्दोगन बुधवार को एक प्राइवेट एयरक्राफ्ट से ढाका के एयरपोर्ट पर उतरे। उनके साथ पूर्व फुटबॉलर मेसुत ओजिल, तुर्की की सरकार समर्थित सहायता एजेंसी TIKA के चेयरमैन अब्दुल्ला आरोन और दूसरे कई खास लोग आए हैं। बिलाल ने बुधवार को ढाका यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया है, जिसे TIKA ने फंड किया है।ढाका में राजनेताओं से मुलाकात और ढाका यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम के अलावा बिलाल एर्दोगन का एक और अहम प्रोग्राम है। बिलाल का कॉक्स बाजार में रोहिंग्या रिफ्यूजी कैंप जाने का प्लान है। तुर्की ने जिस तरह से बांग्लादेश में धार्मिक गुटों को बढ़ावा दिया है, उसे देखते हुए यह दौरा अहम है। रोहिंग्या कैंप में हिंसक गतिविधियों की कई रिपोर्ट सामने आती रही हैं।
भारत के लिए चिंता का सबब
भारत की ओर से बांग्लादेश की नई सरकार के साथ रिश्ते फिर से ठीक करने पर काम शुरू किया है। दूसरी ओर तुर्की ने भी बांग्लादेश में अपने लोगों को भेजना शुरू कर दिया है। तुर्की का ढाका में अपनी पैठ की कोशिश भारत की चिंता बढ़ा सकता है। तुर्की और TIKA की मौजूदगी से भारत की चिंता बढ़ती है।
ऑपरेशन सिंदूर के समय खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े रहे तुर्की और उसकी एजेंसियां बांग्लादेश में इस्लामिस्ट विचारधाराओं को बढ़ावा देने पर काम रही हैं। इससे एक तरफ बांग्लादेश का पॉलिटिकल माहौल भारत के खिलाफ होगा तो दूसरी ओर पूर्वोत्तर में सुरक्षा को लेकर भारत की चिंता बढ़ जाएगी।



