बीजिंग: अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की तरफ से पिछले दिनों आई रिपोर्ट में आश्वस्त किया गया है कि चीनी नेतृत्व 2027 में ताइवान पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2021 से 2027 का समय ‘डेविडसन विंडो’ का था। माना जा रहा था कि इस दौरान चीन सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी तैयारी पूरी कर लेगा। इस लिहाज से तो 2027 को लाइन ऑफ डिमार्केशन के रूप में माना जाना चाहिए, लेकिन अब यह रिपोर्ट कह रही है कि ऐसा नहीं होगा।
ताक में चीन
लेकिन जितना अनिश्चित डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका हो चुका है, उससे कई गुना ज्यादा अनिश्चित चीन पहले से है। शी जिनपिंग ने इस संशय को और बढ़ाया है। फिर भी बहुत कुछ ईरान युद्ध के परिणामों पर निर्भर करेगा। और ईरान में क्या होगा, अभी कुछ कहना मुश्किल है, पर इतना साफ है कि इस युद्ध ने अमेरिका को पश्चिम एशिया में इस कदर फंसा दिया है, जिससे हिंद महासागर अशांत है और इंडो-पैसिफिक में एक वैक्यूम बनता दिख रहा है। स्वाभाविक है कि चीन इसका लाभ उठाने की कोशिश जरूर करेगा।
रणनीतिक गलती
पश्चिम एशिया अगर अमेरिका के समक्ष और अधिक चुनौतियां पेश करता है तो इंडो-पैसिफिक में निश्चित तौर पर जोखिम बढ़ेगा। पिछले दिनों अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक से कुछ सैन्य संसाधन हटाकर पश्चिम एशिया में भेजे हैं। यह शायद अमेरिका की रणनीतिक गलती है। दूसरा यह कि धन के साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी इस्तेमाल हो रहे हैं।
चौतरफा लड़ाई में फंसा अमेरिका
व्यापार युद्ध, वेनेजुएला, ईरान – ट्रंप ने अपने देश को एक साथ कई मोर्चों पर उलझा दिया है। यह रणनीतिक गलती नहीं, अयोग्यता और असफलता है। ट्रंप ने चुनाव के समय अपने भाषणों में कहा था कि उनका शपथ ग्रहण ही ‘लिबरेशन डे’ होगा यानी इस दिन के बाद अमेरिका गलत नीतियों से मुक्त हो जाएगा, लेकिन हुआ उल्टा। आज उनको ब्रिटेन, कनाडा या जर्मनी से सहयोग मिल सकता था, लेकिन इन सभी से वह टैरिफ पर लड़ चुके हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि ट्रंप को यह जानने में कोई दिलचस्पी नहीं कि कमजोर, व्यस्त और बिखरी हुई अमेरिकी सेना भविष्य में चीन के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
PLA की तैयारी
अब आते हैं ‘डेविडसन विंडो’ पर। यह निष्कर्ष अमेरिकी एडमिरल फिलिप डेविडसन ने दिया था। इसके पीछे तथ्य थे कि चीनी सेना तेजी से आधुनिक हो रही है। जिनपिंग ने भी पीपल्स लिबरेशन आर्मी को 2027 तक मॉडर्न और कॉम्बैट रेडी फोर्स बनाने का लक्ष्य दिया है। इसी साल PLA की 100वीं वर्षगांठ है। संभव है कि चीनी सेना अपने मुखिया को कोई तोहफा देने की तैयारी में हो।
असंतोष और भ्रष्टाचार
2027 में अमेरिका और ताइवान में चुनाव होंगे, जबकि जिनपिंग अपने चौथे कार्यकाल के अंत की ओर खिसक रहे होंगे। 79 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह ताइवान मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए अधीर हो सकते हैं। हां, यह प्रश्न तब भी प्रासंगिक हो सकता है कि क्या चीन के पास ताइवान पर सफल आक्रमण करने की क्षमता है? चीन में भी सब कुछ अच्छा नहीं है। हाल ही में उन 5 शीर्ष जनरलों को हटा दिया गया, जो 2022 में ही नियुक्त किए गए थे। भ्रष्टाचार और धीमे सैन्य सुधार भी वहां असंतोष का कारण बने हुए हैं।
ताइवान में मतभेद
राजनीतिक विभाजन ताइवान में भी है, जिसका फायदा चीन उठा सकता है। ताइवान में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी को चीन अलगाववादी मानता है, जबकि विपक्षी कुओमिंतांग के साथ बेहतर संबंधों की चाह रखता है। हालांकि माओ त्से तुंग की सारी लड़ाई कुओमिंतांग से थी। समय दुश्मन और दोस्त की मनोदशा बदल देता है। अगर चुनाव में कुओमिंतांग सत्ता पाती है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी जीतती है तो जोखिम बढ़ेगा।
इंतजार में बीजिंग
2027 में होने वाला अमेरिकी चुनाव भी ट्रिगर का काम कर सकता है। चीन इनके बीच अवसर की ताक में होगा। फिर भी इन सारी संभावनाओं को वर्तमान हालात के हिसाब से देखने की जरूरत है। अगर ईरान युद्ध जल्द खत्म हुआ और अमेरिका विजेता बना तो चीन नियंत्रण में रहेगा, और ताइवान पर खतरा कम। अगर इसका विपरीत हुआ, तो परिस्थितियां भी बदली नजर आएंगी। इसलिए चीन अभी इंतजार करेगा और ताइवान के लिए यह दौर बेहद खतरनाक है।



