अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नहीं जानते हैं कि अमेरिका रूस से क्या खरीद रहा है। रूस से अमेरिका के केमिकल और खाद आयात करने के सवाल पर ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं हैं।
ट्रम्प ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में ANI के सवाल पर कहा,
मुझे इसके बारे में कुछ नहीं पता। हमें इसकी जांच करनी होगी।

यह बयान तब आया जब भारत ने सोमवार को कहा था कि अमेरिका अब भी रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, खाद और केमिकल्स मंगा रहा है।
ट्रम्प आज भारत पर और ज्यादा टैरिफ लगा सकते हैं
ट्रम्प आज भारत पर और ज्यादा टैरिफ का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने कल यानी मंगलवार को कहा था कि वे 24 घंटे में भारत पर भारी टैरिफ लगाने जा रहे हैं। ट्रम्प ने 30 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ का ऐलान किया था।
उन्होंने कहा था कि भारत, रूस के साथ व्यापार करके यूक्रेन के खिलाफ रूसी वॉर मशीन को ईंधन देने का काम कर रहा है। इस वजह से अमेरिका को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
इससे एक दिन पहले भी उन्होंने कहा था कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीद कर ओपन मार्केट में बेच रहा है। भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के हमले से यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं। इस वजह मैं भारत पर टैरिफ में भारी इजाफा करूंगा।
यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इंपोर्ट करता था। मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है।
पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है।
निक्की हेली बोलीं- भारत से रिश्ते खराब न करें
भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने ट्रम्प पर निशाना साधते हुए कहा है कि अमेरिका को भारत जैसे मजबूत सहयोगी के साथ रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए और चीन को छूट नहीं देनी चाहिए।
भारतीय NSA अजित डोभाल मॉस्को पहुंचे
भारत और अमेरिका के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचे हैं। हालांकि, उनका यह दौरा पहले से तय था।
डोभाल के दौरे का मकसद भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस महीने के आखिर तक विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मॉस्को जा सकते हैं।
भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का रूसी तेल खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद रहा है। यूक्रेन युद्ध से पहले रूस अपना क्रूड ऑयल यूरोपीय यूनियन की तरफ से तय 60 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर बेचता था, लेकिन वॉर के बाद से भारत इसे छूट पर खरीदता है।
इसके बाद भारतीय रिफाइनरी कंपनियां इसे प्रोसेस करके यूरोप और अन्य देशों ने बेच देती हैं और उन्हें करोड़ों का फायदा होता है। इसके साथ भारत को अपनी घरेलू जरूरतों के लिए भी सस्ता तेल मिल जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
भारत का जवाब- अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहा
ट्रम्प की धमकी पर कड़ा जवाब देते हुए भारत ने सोमवार को कहा था कि हमारी आलोचना करने वाले देश खुद रूस के साथ खूब व्यापार कर रहे हैं, वो भी बिना किसी मजबूरी के।
भारत सरकार ने कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) भारत की आलोचना कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है। हम अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत को रूस से तेल खरीदना पड़ा, क्योंकि उसका पुराने ऑयल सप्लायर यूरोप को सप्लाई करने लगे थे। उस वक्त अमेरिका ने भारत को ऐसा करने के लिए बढ़ावा दिया था।
भारत ने बताया कि 2024 में EU ने रूस के साथ करीब 85 बिलियन यूरो का व्यापार किया। इसी तरह, अमेरिका अपनी न्यूक्लियर इंडस्ट्री के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, उर्वरक और केमिकल इंपोर्ट कर रहा है।



