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नई दिल्ली: देश में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में तेजी आई है। इस तेजी से सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल, तंबाकू का इस्तेमाल बढ़ने से सरकार का खर्च भी बढ़ गया है। यह जानकारी प्रधानमंत्री की Economic Advisory Council to the Prime Minister (EAC-PM) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

इसके मुताबिक 2011-12 से 2023-24 के बीच देश में तंबाकू उपभोग और उस पर होने वाले खर्च में वृद्धि हुई है। इस अवधि में शहरी परिवारों में तंबाकू उपयोग 55% और ग्रामीण परिवारों में 33% बढ़ा है। रिपोर्ट ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजकोषीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बताया है।

समय से पहले मौत का खतरा

यह शोधपत्र ईएसी-पीएम सदस्य Shamika Ravi और परिषद के युवा प्रोफेशनल Partha Protim Barman द्वारा तैयार किया गया है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू की बढ़ती खपत से बीमारियों और समय से पहले मौतों का खतरा बढ़ता है, जिससे लंबे समय में हेल्थ सर्विस पर दबाव और खर्च दोनों बढ़ेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, 2011-12 से 2023-24 के बीच ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति तंबाकू पर खर्च 58% और शहरी क्षेत्रों में 77% बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू उपभोग करने वाले परिवारों की संख्या 9.9 करोड़ से बढ़कर 13.3 करोड़ हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2.8 करोड़ से बढ़कर 4.7 करोड़ तक पहुंच गया।

शहरों में सिगरेट, राज्यों में गुटखा का दबदबा

  • शहरी क्षेत्रों में 18.1% परिवार सिगरेट का सेवन करते हैं, जबकि 16.8% परिवार गुटखा का उपयोग करते हैं।
  • गुटखा का सबसे अधिक उपभोग मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पाया गया है।

आयुष्मान भारत पर बढ़ सकता है बोझ

रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीब परिवारों में तंबाकू का अधिक इस्तेमाल करने से बीमारियां पैदा होती हैं। इसका आर्थिक बोझ अंततः सरकारी हेल्थ स्कीम पर पड़ता है। विशेष रूप से आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) जैसी स्कीम पर। ऐसे में इस स्कीम पर सरकार का आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 13 लाख मौतें तंबाकू सेवन से जुड़ी हैं। तंबाकू के इस्तेमाल से दिल और सांस से जुड़ी बीमारियां होने का ज्यादा खतरा होता है। साथ ही कैंसर होने का एक प्रमुख कारण तंबाकू का इस्तेमाल भी है।

बहुआयामी रणनीति की सिफारिश

रिपोर्ट में तंबाकू नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है। इसमें ये प्रमुख हैं:

  • विभिन्न तंबाकू उत्पादों पर कर संरचना को तर्कसंगत और सख्त बनाना
  • अवैध और सरोगेट बिक्री पर कड़ी निगरानी
  • लक्षित जागरूकता अभियान
  • प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में निवारक परामर्श को शामिल करना
  • रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि केवल टैक्स बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि विज्ञापन और प्रमोशनल गतिविधियों पर भी कड़ी नियामकीय निगरानी जरूरी है।

सरकार का खर्च बढ़ा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल स्वास्थ्य खर्च में सरकार की हिस्सेदारी साल 2015 के 29% से बढ़कर साल 2022 में 48% हो गई है, जिससे जेब से होने वाला खर्च घटा है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर तंबाकू उपभोग पर लगाम नहीं लगी, तो सार्वजनिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।