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नई दिल्ली: जब भी नमक की बात आती है तो दिमाग में सफेद बारिक चूरे जैसी चीज घूमती है। लेकिन क्या कभी सोचा है कि नमक के भी कई फ्लेवर हो सकते हैं? ऐसे ही फ्लेवर के नमक बेच रही हैं उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके टिहरी गढ़वाल की शशि बहुगुणा रतूड़ी। उनका ब्रांड नमकवाली (Namakwali) आज काफी फेमस है। हिमालय का खास नमक उत्तराखंड से निकल विदेशों तक पहुंच गया है। इस ब्रांड का ‘पिस्यू लूण’ लोगों की जुबां पर चढ़ गया है। पिस्यू लूण का मतलब सिलबट्टे पर पिसा हुआ नमक है। आज शशि बहुगुणा की कंपनी का सालाना रेवेन्यू लाखों रुपये है।

शशि बहुगुणा को पहाड़ी खाने से बहुत लगाव था। उन्होंने अपने बेटे की मदद से साल 2018 में इसकी शुरुआत की। शशि बहुगुणा रतूड़ी के छोटे बेटे सुवेंदु के मुताबिक, ‘मां के साथ की कई महिलाएं नमक पीसती थीं। ये नमक वो बिना पैसे के बांट देती थीं। हम इन्हें ‘नमकवाली’ कहते थे। हमने 58 साल की उम्र में मां को बिजनेस वुमन बनाने का फैसला किया। हमने पहाड़ की महिलाओं को उनके किचन में रखे सिलबट्टे को अपना हथियार बनाने को कहा। महिलाओं ने काम शुरू किया और आज सिलबट्टे पर पिसा हुआ नमक ही उनकी पहचान बन गया है।’

2018 में हुई शुरुआत

सुवेंदु ने बताया कि उन्होंने ‘नमकवाली’ नाम से 2018 में सोशल मीडिया पर पेज बनाया। इस पेज पर लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। ऑर्डर भी आने लगे। साल 2020 में उन्होंने अपनी वेबसाइट बनाई। साथ ही इसे अमेजन पर भी बेचना शुरू किया। तब फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इसका खूब प्रचार किया गया। इस दौरान यह विदेशों में भी फेमस हो गया। यह नमक आज विदेशों में भी पहचान बना रहा है।

क्या है नमक में खास?

यह पिस्यू लूण नमक उत्तराखंड के टिहरी, गढ़वाल और आसपास के इलाकों से आता है। इसे पचाने में बहुत फायदेमंद माना जाता है, खासकर पेट की एसिडिटी को कम करने में। इस नमक में ताजी जड़ी-बूटियां और मसाले भी मिलाए जाते हैं। जैसे पुदीना, धनिया, हल्दी, अदरक, लहसुन और मिर्च। इन सबको पत्थर या सिल-बट्टे पर पीसकर नमक में मिलाया जाता है। शशि बताती हैं कि हर जड़ी-बूटी और मसाला उत्तराखंड के हिमालय की ऊंची चोटियों से हाथ से चुना जाता है। यह बहुत पौष्टिक है और 100% ऑर्गेनिक है।