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आज हम यहां बात कर रहे हैं बॉलीवुड की एक महान सिंगर की, जिन्होंने फिल्मी और म्यूजिक के दीवानों को अनगिनत खूबसूरत गाने दिए। ये सिंगर बॉलीवुड के उन सितारों में शामिल हैं, जिनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स तक में शामिल है। हालांकि, कहते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनकी आवाज को खराब बताकर उन्हें स्टूडियो से बाहर कर दिया गया था। बाद में इन्होंने प्रफेशनल लाइफ में अपनी वो पहचान बनाई जो आज हर किसी के वश की बात नहीं। वहीं ये प्रफेशनल लाइफ को लेकर भी काफी सुर्खियों में रहीं। पहले तो उन्होंने अपनी बहन के सेक्रेटरी से शादी की जो उनसे डबल उम्र के थे। इसके बाद दूसरी शादी पर भी खूब मचा था बवाल।

वैसे तो ये सितारे उस लिस्ट में शामिल हैं जिनकी चमक कभी खो नहीं सकती। ताउम्र भी नहीं और उनके चले जाने के बाद भी उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन आज का दिन खास है क्योंकि इतिहास में आज 8 सितंबर की तारीख बहुत सुरीली और शोख गायिका आशा भोसले (92 साल) के जन्मदिन के तौर पर दर्ज है। हजारों गीतों को अपनी आवाज से अमर बना देने वाली आशा भोसले को भारतीय सिने जगत की महान सिंगर्स में से एक गिना जाता है। आज यहां हम उनकी पर्सनल लाइफ का वो किस्सा बता रहे हैं जो उनकी लाइफ पर एक ग्रहण की तरह लगा और इसने उनसे काफी कुछ छीन लिए।

गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

बताया जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 12 हजार से अधिक गीत गाए। साल 2011 में उन्हें संगीत के इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाले कलाकार की वजह से गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया। वो तब 9 साल की थीं, जब पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनका परिवार सांगली के छोटे से गांव गोआर से निकलकर पुणे से कोल्हापुर और फिर मुंबई आ गया। यहां आने के बाद उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने अपने परिवार का पेट भरने के लिए फिल्मों में गाना और एक्टिंग शुरू की। अपनी बहन की तरह आशा ने भी गाना शुरू किया और अलग-अलग भाषाओं में कई गाने गाए। राज कपूर की ‘बूट पॉलिश’ से लेकर बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’, ‘धूल का फूल’, ‘गुमराह’, ‘वक्त’, ‘हमराज’, ‘आदमी और इंसान’ जैसे कई गाने गाए।

रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया था

सिंगिंग की दुनिया में माहिर आशा भोसले को रिजेक्शन भी झेलना पड़ा है। आशा भोसले और किशोर कुमार ने एक साथ 600 से अधिक गाने साथ मिलकर गाए। आपको जानकर हैरानी होगी किआरजे अनमोल के साथ बातचीत के दौरान आशा भोसले ने खुद बताया था कि करियर के शुरुआती दौर में ुनकी आवाज को रिजेक्ट कर दिया गया था। उन्होंने बताया था कि एक बार खराब आवाज बताकर किशोर कुमार के साथ रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकाल दिया गया था।

16 साल की उम्र में 31 साल के सेक्रेटरी से शादी

उनकी पर्सनल लाइफ में तूफान तब आया जब केवल 16 साल की उम्र में उनका दिल अपनी ही दीदी लता मंगेशकर के सेक्रेटरी पर आ गया। उन दिनों लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी हुआ करते थे गणपतराव भोसले जो तब करीब 31 साल के थे। दोनों ने साल 1949 में भागकर शादी कर ली जिसके बात लता मंगेशकर ने उनसे रिश्ता ही तोड़ लिया था। यहां से शुरू हुई थी असली आफत जिसका एहसास आशा भोसलो को कभी नहीं था।

आशा भोसले के साथ वो मारपीट तक पर उतारू हो जाते थे

कहते हैं कि जब आशा भोसले पहली बार मां बनीं तो परिवार ने सारी नाराजगी छोड़ दी और मंगेशकर परिवार ने उन्हें अपनाया। लेकिन गणपतराव को अब ये पसंद नहीं आ रहा था और वो चाहते थे कि आशा अपने परिवार से रिश्तान रखें। खासकर उन्हें लता मंगेशकर से काफी दिक्कत थी जिनके वो कभी सेक्रेटरी रह चुके थे। इसके बाद मामला और खराब हुआ। कहते हैं कि गणपतराव आशा को पैसों के लिए भी परेशान करने लगे थे और उन्हें लता मंगेशकर से मिलने से भी रोकते थे। इन चीजों को लेकर दोनों के बीच झगड़े शुरू हुए। बताया जाता है कि गणपतराव पत्नी के साथ मारपीट तक पर उतारू हो जाते थे।

‘बेटा होनेवाला था, मुझे घर से निकलने के लिए कह दिया गया’

कविता छिब्बर को दिए इंटरव्यू में एक बार आशा ने बताया था, ‘मैंने बहुत कम उम्र में अपने से 20 साल बड़े आदमी से शादी कर ली थी। हमारी लव मैरिज थी और लता दीदी ने मुझसे लंबे समय तक बात नहीं की थी। गणपतराव का परिवार पुराने खयाल का था और वे एक सिंगिंग स्टार को बहू के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। मेरे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया। जब मेरा सबसे छोटा बेटा आनंद होनेवाला था तो मुझे घर से निकलने के लिए कह दिया गया और मैं अपनी मां-बहनों के पास वापस लौट गई।’

उन्हें आशा भोसले को दर्द देने में उन्हें मजा आता था

गणपतराव और आशा को तीन बच्चे हुए जिनमें से 2 बेटे और एक बेटी हुई। शादी के करीब 11 साल बाद आखिर उन्होंने अपना ये रिश्ता खत्म किया और 1960 में दोनों अलग हो गए। सिंगर की बायोग्राफी ‘Asha Bhosle: A Life In Music‘ में कहा गया है कि गणपतराव नेआशा पर तब भी हाथ उठाया था जब वो प्रेग्नेंट थीं। कई बार नौबत ये होती कि उन्हें अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ा था। इस बायोग्राफी में कहा गया है कि उनके पति काफी शॉर्ट-टेम्पर्ड आदमी थे और शायद उन्हें आशा भोसले को दर्द देने में उन्हें मजा आता था। इस किताब में आशा भोसले ने कहा, ‘मैंने अपना पूरा कर्तव्य निभाया, जैसे हिंदू धर्म में पत्नी निभाती है।’