तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के साथ जंग अमेरिका के लिए बेहद भारी पड़ रही है। युद्ध शुरू होने के बाद से पहले 20 दिनों में अमेरिका का कम से कम 16 सैन्य विमानों का नुकसान उठाना पड़ा है। इन 10 रीपर स्ट्राइक ड्रोन हैं, जिन्हें ईरान ने निशाना बनाया है। इसके अलावा आधे दर्जन अन्य विमान हमलों या दुर्घटनाओं में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। अमेरिका को सबसे बड़ा झटका शुरुआती दिनों में ही लगा, जब तीन F-15 लड़ाकू विमान कुवैत में फ्रेंडली फायर में गिरा दिए गए।
अमेरिकी एयर टैंकर क्रैश
इसके बाद एक अमेरिकी एयर टैंकर KC-135 अभियान के दौरान इराक में क्रैश हो गया। इस हादसे में एयर टैंकर पर सवार चालक दल के सभी 6 सदस्य मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के प्रिंस सलमान एयर बेस पर खड़े 5 अन्य विमानों को उस समय नुकसान पहुंचा, जब ईरानी मिसाइल ने सैन्य अड्डे पर हमला किया।
रीपर ड्रोन बने ईरान का निशाना
ब्लूमबर्ग न्यूज ने मामले से परिचित एक व्यक्ति के हवाले से बताया कि ईरानी सुरक्षा बलों ने अब तक केवल बिना चालक वाले रीपर ड्रोन को ही निशाना बनाया है। इसमें कम से कम 9 हवा में ही नष्ट हो गए। इसके अलावा जॉर्डन के एक एयरफील्ड पर एक रीपर ड्रोन बैलिस्टिक मिसाइल की चपेट में आ गया था।
F-35 को भी ईरान ने बनाया निशाना
इस बीच CNN ने गुरुवार को रिपोर्ट किया कि अमेरिका के सबसे एडवांस कहे जाने वाले F-35 फाइटर जेट ने मध्य पूर्व में एक अमेरिकी हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग की। इसे कथित तौर पर ईरान ने निशाना बनाया था। रिपोर्ट में सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और पायलट की हालत स्थिर है।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट को क्यों ज्यादा नुकसान?
एक्सपर्ट का कहना है कि ऑपरेशन को बड़े पैमाने पर चलाया जाना शायद ज्यादा नुकसान की वजह हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसी पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वे युद्ध में हुए नुकसान के आकलन पर चर्चा नहीं करेंगे। यह पहली बार नहीं है, जब अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचा है। इसके पहले साल 2025 में यमन के हूथी विद्रोहियों ने कई अमेरिकी रीपर ड्रोन को मार गिराया था। हूथी विद्रोहियों को ईरान से हथियार और प्रशिक्षण मिलता है।



