नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज की खाड़ी को लेकर आज बड़ी बात कह दी। ईरान युद्ध के बीच देश को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आयात नहीं करता है और आगे भी इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। जो देश इस रास्ते से तेल मंगाते है, उन्हें इस मार्ग की सुरक्षा खुद करनी चाहिए और इसे संभालकर रखना चाहिए। होर्मुज की खाड़ी से दुनिया का करीब 30 फीसदी तेल गुजरता है। एशिया के साथ-साथ यूरोप और अफ्रीका के देश भी वहां से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स मंगाते हैं।
ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल की कीमत में भारी तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड आज कारोबार के दौरान 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 13 फीसदी उछाल के साथ 112 डॉलर प्रति बैरल चला गया। होर्मुज की खाड़ी से आने वाले तेल पर सबसे ज्यादा निर्भरता एशिया की है। यही वजह है कि एशियाई देशों में हाहाकार मचा हुआ है। फिलीपींस ने तो अपने यहां नौ दिन पहले एनर्जी एमरजेंसी लागू कर दी थी।
किसकी कितनी हिस्सेदारी?
फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला 45 फीसदी क्रूड पिछले साल एशियाई देशों को गया। साथ ही एशियाई देश 30 फीसदी पेट्रोल और नाफ्था, 9 फीसदी डीजल और 5 फीसदी जेट फ्यूल इसी रास्ते से मंगाते हैं। यूरोप का 39 फीसदी जेट फ्यूल और किरोसीन इसी रास्ते जाता है। इसी तरह अफ्रीका का 41 फीसदी जेट फ्यूल और 23 फीसदी डीजल इस रास्ते गुजरता है।
- होर्मुज की खाड़ी से दुनिया का 31% क्रूड गुजरता है
- 16% पेट्रोल, 10% और 19% जेट फ्यूल भी गुजरता है
- 45% क्रूड, 30% पेट्रोल और नाफ्था एशियाई देशों को
- यूरोप का 39% जेट फ्यूल और किरोसीन इसी रास्ते जाता है
- अफ्रीका का 41% जेट फ्यूल और 23% डीजल यहीं से गुजरता है
कुल मिलाकर दुनिया का 31 फीसदी कच्चा तेल, 16 फीसदी पेट्रोल, 10 फीसदी डीजल और 19 फीसदी जेट फ्यूल इसी रास्ते से गुजरता है। यही वजह है कि होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही बंद होने को दुनिया के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर लंबे समय तक तेल की कीमतें कम नहीं हुई तो इससे ग्लोबल इकॉनमी पर काफी असर पड़ सकता है।



