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अरशद वारसी ने वैसे तो साल 1996 में ‘तेरे मेरे सपने’ फिल्‍म से एक्‍ट‍िंग डेब्‍यू किया था, लेकिन 2003 में रिलीज ‘मुन्ना भाई MBBS’ ने उन्‍होंने पॉपुलैरिटी दी। राजकुमार हिरानी की इस फिल्‍म में सर्किट के उनके रोल और संजय दत्त के साथ उनकी जुगलबंदी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। साल 2006 में इसका सीक्‍वल ‘लगे रहो मुन्‍ना भाई’ रिलीज हुई। एक बार फिर मुन्‍ना और सर्किट की जोड़ी पर दर्शकों ने खूब प्‍यार लुटाया। लेकिन अब बीते 19 साल से इसके तीसरे पार्ट को लेकर इंतजार जारी है। जबकि बीच-बीच में कई बार ‘मुन्‍ना भाई पार्ट 3’ को लेकर भी चर्चा हुई है। यहां तक बताया गया कि इसका नाम ‘मुन्‍ना भाई चले अमेरिका’ है, लेकिन फिर फिल्‍म अटक गई। अरशद वारसी ने अब इसके कारण को लेकर खुलासा किया है।

अरशद ने हाल ही ‘द लल्‍लनटॉप’ को इंटरव्‍यू दिया। इस दौरान उन्‍होंने अपने फैन फेवरेट किरदार ‘सर्किट’ और ‘मुन्‍ना भाई फ्रेंचाइजी’ पर बात की। उन्‍होंने लंबे समय से बंद पड़ी तीसरी किस्त ‘मुन्ना भाई चले अमेरिका’ को लेकर खुलासा किया कि असल मामला फिल्‍म की कहानी को लेकर फंसा है।

शाहरुख खान की फिल्‍म से मिलती-जुलती थी कहानी

अरशद वारसी ने मुताबिक, यह फिल्‍म इसलिए अटक गई कि इसकी कहानी शाहरुख खान की ‘माई नेम इज खान’ (2010) से काफी मिलती-जुलती थी। उन्होंने कहा, ‘जहां तक मुझे पता है, ‘माई नेम इज खान’ की कहानी बहुत मिलती-जुलती निकली। इस फिल्म में भी मुन्ना और सर्किट अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलते हैं।’

हिरानी ने तीन बार बदली थी ‘पीके’ की कहानी

एक्‍टर ने आगे कहा, ‘राजकुमार हिरानी ओरिजिनैलिटी को लेकर बहुत पर्टिकुलर हैं। उन्हें यह पसंद नहीं है उनका काम दूसरी फिल्मों जैसा लगे। जब उन्‍हें ‘ओह माय गॉड’ (2012) के बारे में पता लगा, तो उन्‍होंने ‘पीके’ (2014) के दूसरे हाफ की कहानी को तीन बार फिर से लिखा।’

‘मुन्‍ना भाई 3’ के लिए तैयार हैं तीन स्‍क्र‍िप्‍ट्स

हालांकि, अरशद वारसी ने एक खुशखबरी भी दी। उन्‍होंने बताया कि राजकुमार हिरानी के पास फिलहाल तीसरी ‘मुन्ना भाई’ फिल्म के लिए तीन स्क्रिप्ट तैयार हैं। वह कहते हैं कि ये तीनों ही स्‍क्र‍िप्‍ट आज के दौर में रिलीज हो रही ज्यादातर फिल्मों से कहीं बेहतर हैं।

‘सर्किट’ का रोल नहीं करना चाहते थे अरशद वारसी

फिल्‍म फ्रेंचाइजी में अपने किरदार ‘सर्किट’ के बारे में भी उन्‍होंने दिलचस्‍प बातें बताई। उन्‍होंने खुलासा किया कि वह यह रोल छोड़ने वाले थे। अरशद ने कहा, ‘मैं छोटे रोल नहीं करना चाहता था। तो, मैं उनसे यह कहने जा रहा था कि सर, अगर आपके पास अच्छे रोल हों तो ही मुझे कॉल करें। अगर मैं ऐसे छोटे किरदार करता रहा, तो मेरा करियर बर्बाद हो जाएगा।’ अरशद ने बताया कि वह फिल्म को मना करने के लिए विधु विनोद चोपड़ा के ऑफिस जा रहे थे, तभी किस्मत ने उन्‍हें टैरो कार्ड रीडर रितंभरा दीवान से मिलवाया और फिर सबकुछ बदल गया।

अरशद के लिए सच हुई टैरो कार्ड रीडर की भविष्‍यवाणी

अरशद वारसी ने कहा, ‘मैंने उन्हें फिल्म और उससे जुड़े लोगों के बारे में बताया। इस प्रोजेक्ट में शुरू में तब्बू को कास्ट किया गया था। रितंभरा ने अपने कार्ड देखे और तुरंत मुझे उस रोल को लेने के लिए कहा। पूरे विश्वास के साथ भविष्यवाणी की कि यह फिल्म चलेगी। मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने उनसे कहा कि आप नहीं समझतीं कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है। एक बात और दिलचस्‍प है कि रितंभरा ने यह भी भविष्यवाणी की थी कि इसकी फीमेल लीड बदल जाएगी। जब मैं विधु विनोद चोपड़ा के ऑफिस पहुंचा, तो वहां ग्रेसी सिंह को देखकर हैरान हो गया। पता चला कि डेट्स की दिक्कतों के कारण तब्बू ने फिल्म छोड़ दी थी।’अरशद वारसी ने यह भी बताया कि फिल्‍म में पहले ‘सर्किट’ का असली नाम ‘खुजली’ था। उन्होंने कहा, ‘यह मुझे कादर खान के निभाए किरदारों की याद दिलाता था।