Spread the love

नई दिल्ली: बुधवार को भारतीय रुपये में जबरदस्त गिरावट देखी गई। विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने और दुनिया भर के बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता की वजह से रुपया 68 पैसे टूटकर 91.65 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। RBI का आधिकारिक रेफरेंस रेट USD/INR के लिए 91.5500 था। रुपया बाजार में 91.65 पर बंद हुआ, जो रेफरेंस रेट से ऊपर था।

हालांकि, जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के पास स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त भंडार है, लेकिन फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता रुपये पर भारी पड़ रही है। इससे पहले रुपये का सबसे निचला स्तर 16 दिसंबर 2025 को 91.14 रहा था। इस महीने रुपया 1.50% गिर चुका है। बुधवार को मुद्रा बाजार में रुपया 91.05 पर खुला था, लेकिन कारोबार के दौरान यह 91.74 के स्तर तक पहुंच गया था। अंत में यह पिछले बंद भाव से 68 पैसे गिरकर 91.65 पर बंद हुआ। पिछले साल 21 नवंबर (98 पैसे गिरा था) के बाद से यह रुपये की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।

क्या है वजह?

कोटक महिंद्रा एएमसी के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) अभिषेक बिसेन ने कहा, ‘भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अस्थिर पूंजी प्रवाह के दबाव का सामना कर रही हैं।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक कारोबार पर असर डाल रहे हैं। वैश्विक तनाव में ग्रीनलैंड विवाद और वेनेजुएला के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण शामिल है। ग्रीनलैंड विवाद ने अमेरिका-यूरोप संबंधों को खराब किया है और इससे नाटो के टूटने का खतरा है।

बिसेन ने कहा कि भारत के लिए, अमेरिका के साथ लंबित व्यापार समझौता एक प्रमुख स्थिरता का कारक बना हुआ है क्योंकि इसके निष्कर्ष से विश्वास एवं द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.61 पर रहा। घरेलू शेयर बाजार के मोर्चे पर सेंसेक्स 270.84 अंक टूटकर 81,909.63 अंक पर जबकि निफ्टी 75 अंक फिसलकर 25,157.50 अंक पर बंद हुआ।