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सीधी: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने सीधी के प्रधान जिला न्यायाधीश को एक 13 साल पुराने सिविल मुकदमे को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। यह आदेश 13 जनवरी, 2026 को जारी किया गया। हाई कोर्ट ने सीधी के एक सिविल जज के रवैये पर हैरानी जताई, जिन्होंने एक मामले को अंतिम सुनवाई के लिए छह हफ्तों के भीतर निपटाने के हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद सात हफ्तों बाद की तारीख तय कर दी थी।

कोर्ट ने लगाई फटकार

न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत ने मामले को लेने का कोई प्रयास नहीं किया और तारीख तय करने में छह हफ्तों से ज्यादा का समय लगा दिया। यह रवैया न्यायिक अनुशासन और पदानुक्रम के प्रति असम्मान दिखाता है। इससे वादी के मन में यह धारणा बनती है कि न्याय व्यवस्था में कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

‘समय नहीं था तो दूसरे को सौंपना था केस’

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जज के पास तय समय में मामले की सुनवाई के लिए समय नहीं था, तो प्रधान जिला न्यायाधीश को यह मामला किसी दूसरे जज को सौंप देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने वादी के इस तरह के आवेदन को भी खारिज कर दिया था।

13 साल पुराना था मामला

न्यायमूर्ति विवेक जैन ने कहा कि यह मामला लगभग 13 साल पुराना था और निचली अदालत पिछले दो सालों से अंतिम दलीलें सुनने से इनकार कर रही थी। 8 जनवरी, 2026 को भी अगली तारीख 3 फरवरी, 2026 तय की गई थी। इस रवैये को देखते हुए, अदालत का मानना है कि पीठासीन अधिकारी इस मुकदमे का फैसला करने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए, यह उचित था कि प्रधान जिला न्यायाधीश इस मामले को किसी ऐसे पीठासीन अधिकारी को सौंपते, जिसके पास मामले को निपटाने के लिए पर्याप्त न्यायिक समय हो। हाई कोर्ट के आदेश की एक प्रति सीधी के जिला न्यायाधीश, सीधी के निरीक्षण प्रभारी जिला न्यायाधीश और सीधी के पोर्टफोलियो जज को प्रशासनिक कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।