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भोपाल। प्रदेश में भूमि की रजिस्ट्री के अभाव में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए अपात्र हो रहे आवेदकों की रजिस्ट्री अब राज्य सरकार अपने खर्च पर कराएगी। दरअसल, ऐसे उपनगर जो पहले ग्रामीण क्षेत्र में थे, अब शहरी परिधि में आ गए हैं, लेकिन पंचायत स्तर पर रजिस्ट्री नहीं हुई।

ऐसे लोग रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में जमीन की रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है। इससे अत्यंत गरीब लोग रजिस्ट्री न होने के कारण योजना से वंचित हो रहे हैं।सरकार ने इसे देखते हुए रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए छह हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है।

भूमि स्वामित्व की कानूनी अड़चनें दूर होंगी

प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को पक्का घर देने के लिए उनके भूमि स्वामित्व (पट्टा/रजिस्ट्री) की कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए विशेष कदम उठा रही है।

सरकार उन गरीबों के लिए अपने खर्च पर भूमि की रजिस्ट्री या पट्टा प्रदान करने की प्रक्रिया कर रही है, जिनके पास घर बनाने के लिए जमीन के कागजात नहीं हैं। भूमि का सत्यापन कर वस्तुस्थिति ज्ञात की जाएगी, इसके बाद ही रजिस्ट्री की जाएगी या पट्टा दिया जाएगा।

विधानसभा में उठा मुद्दा

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के पूर्व मंत्री व कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में यह मामला उठाया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना में पहले रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं थी, अब इसे अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे लोगों पर अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है।

उन्होंने कहा था कि पीएम आवास के नियमों में संशोधन किया गया है, जो गरीबों के लिए उचित नहीं है। गरीब लोग रजिस्ट्री कैसे कराएंगे। इससे बहुत कम लोग होंगे जिनके पास रजिस्ट्री होगी। उन्होंने नियमों को शिथिल किए जाने की मांग की थी। इसका समर्थन सागर से भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने भी किया था।