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उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के ​मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार को मीडिया से चर्चा में बताया कि मप्र मेडिकल एजुकेशन का हब बन रहा है। सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की मिलाकर कुल 5550 सीटें एमबीबीएस की हो गई हैं। इनमें सरकारी कॉलेजों में 2275 से बढ़कर 2850 सीटें हो गई है।

वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी मेडिकल कॉलेज 12 से बढ़कर 14 संख्या हो गई है।

शुक्ला ने बताया कि इसके अलावा पीपीपी मॉडल पर 9 जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटों की उपलब्धता से प्रदेश में उन्नत चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं को नया आयाम मिला है।

आधुनिक चिकित्सा को लेकर बोले कि इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक लिनियर एक्स-रेटर मशीनें लगाई। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन एवं एमआरआई मशीनों को मंजूरी दी।

जबकि ग्वालियर, रतलाम और विदिशा में एमआरआई एवं सीटी सुविधाओं का विस्तार किया। मप्र में देहदान में बढ़ोतरी हुई और 38 नागरिकों को मरणोपरांत गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर सम्मानित किया गया है। एयर एम्बुलेंस की मदद से 109 गंभीर रोगियों को समय पर अस्पताल पहुंचाया।