इस्लामाबाद: भारत फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए अगले महीने समझौता कर सकता है। भारत के इस संभावित सौदे को लेकर पाकिस्तान डरा हुआ है। पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट्स भारत के इस महाडील पर चर्चा कर रहे हैं और इस्लामाबाद के लिए ‘चिंता की बात’ बता रहे हैं। पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट बिलाल खान ने भारत के संभावित 114 राफेल सौदे को ‘पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए चिंताजनक संकेत’ बताया है। बिलाल खान ने तर्क दिया है कि असली चुनौती सिर्फ भारतीय वायुसेना के बेड़े में 114 एडवांस राफेल का जुड़ना ही नहीं है, बल्कि इससे ज्यादा चिंताजनक बात उनका मजबूती और कुशलता के साथ मैनेजमेंट और गहरे नेटवर्क में इंटीग्रेशन है, जो पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए टेंशन की बात होगी।
बिलाल खान ने भारत के 114 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को भारतीय वायुसेना के लिए बहुत बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने कहा है कि एक कॉमन, मॉडर्न मल्टीरोल फाइटर के इर्द-गिर्द बनी फोर्स स्ट्रक्चर भारत को ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल डॉक्ट्रिन को बेहतर बनाने में मदद करेगी। इस सौदे के बाद भारतीय वायुसेना लंबे समय से चली आ रही लड़ाकू विमानों की समस्या से निजात पा लेगी और उसकी संख्यात्मक श्रेष्ठता का असर युद्ध के मैदान में दिखेगा, जहां वो अपनी असली ताकत का प्रदर्शन कर पाएगी।
बिलाल खान ने कहा है कि पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान एयरफोर्स ने, भारतीय वायुसेना की मजबूत ताकत और ज्यादा लड़ाकू विमानों को देखते हुए बेहतर ट्रेनिंग, स्टैंडर्ड नेटवर्क इंटीग्रेशन पर भरोसा दिखाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना के पास अगर इतने नये एडवांस लड़ाकू विमान आते हैं तो पाकिस्तान एयरफोर्स ने अगर कुछ बढ़त बनाया है, तो वो खत्म हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि भारतीय वायुसेना के पास करीब करीब 200 राफेल फाइटर जेट का होना, सौ से ज्यादा तेजस लड़ाकू विमान और मॉडर्न Su-30MKI लड़ाकू विमानों का होना, पाकिस्तान एयरफोर्स को बुनियादी स्तर पर अपने हवाई युद्ध के बारे में फिर से सोचने को मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी फोर्स भारत को एयर डिफेंस, स्ट्राइक और आक्रामक काउंटर-एयर मिशन में बेजोड़ गहराई, सहनशक्ति और लचीलापन देगी।
बिलाल खान ने उन विचारों को भी खारिज किया है, जिसमें भारतीय राफेल को काउंटर करने के लिए चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की बात की गई है। उन्होंने कहा कि अगर ये खरीद होती भी है, तो इसे राफेल का सीधा जवाब नहीं माना जाएगा। बल्कि इसे एक भरोसेमंद डीप-स्ट्राइक स्टील्थ प्लेटफॉर्म के रूप में एक लंबे समय से चली आ रही और ऐतिहासिक रूप से नकारी गई क्षमता की कमी को पूरा करने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने लिखा है कि "राफेल सिर्फ एक फाइटर नहीं है, बल्कि यह सेंसर, हथियारों और डेटा लिंक के एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है।" उन्होंने चेतावनी दी है कि "भारत के विमानों की बराबरी करने की कोशिश करना पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से गलत तरीका होगा।"



