अहमदाबाद: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए सुपर-8 के मुकाबले में भारतीय टीम को न केवल हार का सामना करना पड़ा, बल्कि उसके नाम एक ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज हो गया, जिसे कोई भी टीम याद नहीं रखना चाहेगी। 188 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह ढह गई और पूरी टीम महज 111 रनों पर सिमट गई। 76 रनों की यह करारी हार रनों के लिहाज से टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में भारत की अब तक की सबसे बड़ी हार है।
वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे शर्मनाक आंकड़ा
भारतीय क्रिकेट टीम के लिए टी20 वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे बुरा अनुभव साल 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ (49 रन की हार) रहा था। लेकिन 2026 के इस सीजन में दक्षिण अफ्रीका ने उस 16 साल पुराने जख्म को और गहरा कर दिया है। 76 रनों के अंतर ने न केवल भारत के आत्मविश्वास को हिलाया है, बल्कि सेमीफाइनल की दौड़ में नेट रन रेट (NRR) को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे पहले 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ नागपुर में मिली 47 रनों की हार तीसरे स्थान पर आ गई है।
ओवरऑल टी20I में दूसरी सबसे बड़ी शिकस्त
अगर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पूरे इतिहास पर नजर डालें, तो रनों के मामले में यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी हार के रूप में दर्ज की गई है। भारत के लिए इस फॉर्मेट में सबसे बड़ी हार का रिकॉर्ड साल 2019 का है, जब न्यूजीलैंड ने वेलिंगटन में टीम इंडिया को 80 रनों से मात दी थी। अहमदाबाद में मिली यह 76 रनों की हार अब इस सूची में दूसरे स्थान पर है।
टीम इंडिया के हार का बड़ा कारण
अहमदाबाद की पिच पर भारतीय बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की गति और उछाल के सामने पूरी तरह बेबस नजर आए। अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह ने गेंदबाजी में अपना काम बखूबी किया था, लेकिन बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम के विफल होने के बाद मध्यक्रम भी दबाव नहीं झेल सका। इस हार ने भारतीय टीम मैनेजमेंट के सामने कई तकनीकी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब भारत को अपने अगले मुकाबलों में न केवल जीत दर्ज करनी होगी, बल्कि भारी अंतर से जीत हासिल कर अपने रन रेट को सुधारना होगा ताकि सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार रहें।



