प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेला 2026 में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम नोज तक पालकी से जाने को लेकर हठ किया। तीन घंटे तक प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों के बीच खींचतान चलती रही। पुलिस अधिकारी लगातार उन्हें पैदल संगम नोज तक जाने का अनुरोध करते रहे। वहीं, शंकराचार्य लगातार पालकी से जाने की जिद पर अड़े रहे। इस दौरान शंकराचार्य समर्थकों ने बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास किया। इस मामले को लेकर प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। पहले भी प्राधिकरण ने उनके शंकराचार्य लिखे जाने के मसले पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
दूसरी नोटिस में क्या है?
प्रयाराज माघ मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 18 जनवरी की तिथि में नोटिस जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि मौनी आमावरया के पावन पर्व पर आपात परिस्थितियों में उपयोग में लाए जाने वाले पांटून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर को तोड़ा गया। संगम अपर मार्ग से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बग्घी पर सवार होकर आप भीड़ के साथ जा रहे थे। मेला पुलिस एवं प्रशासन की ओर से संगम क्षेत्र में किसी प्रकार के वाहन न ले जाने की घोषणा बार-बार ध्यनि विस्तारक यंत्र और वायरलेस सेट से की जा रही थी। उस समय स्नानार्थियों की अत्यतिक भीड़ थी तथा केवल पैदल आवागमन की अनुमति दी गई थी।
माघ मेला प्रशासन का कड़ा रुख
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 18 जनवरी को भेजा गया नोटिस अब वायरल हो रहा है। इसमें उन्हें दी जा रही सभी सरकारी सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। साथ ही, भविष्य में माघ मेले में उनके प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की बात भी कही गई है। नोटिस श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ, सहारनपुर और बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर, मनकामेश्वर मंदिर के शिविर संचालकों के नाम पर जारी किया गया है।
पहली नोटिस का दिया जवाब
इस बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं मेलाधिकारी ऋषिराज की ओर से जारी नोटिस का जवाब दे दिया गया है। उनके वकील अंजनी कुमार मिश्र की ओर से दाखिल आठ पेज के जवाब में प्रशासन से 24 घंटे के भीतर नोटिस वापस लेने की मांग की गई है। जवाब में कहा गया है कि शंकराचार्य का पट्टाभिषेक पहले ही संपन्न हो चुका था। प्रशासन की ओर से संदर्भित आदेश बाद के समय का है। वकील ने चेतावनी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने सहित अन्य आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।



