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अमिताभ बच्‍चन के नाती अगस्‍त्‍य नंदा, दिवंगत धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत की फिल्‍म ‘इक्‍कीस’ नए साल के मौके पर 1 जनवरी 2026 को रिलीज हो रही है। श्रीराम राघवन के डायरेक्‍शन में बनी यह एक बायोग्राफी वॉर ड्रामा है, जो भारतीय सेना के अधिकारी और टैंक कमांडर, शहीद सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी की वीर गाथा है। महज 21 साल की उम्र में, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बसंतर की लड़ाई में उन्‍होंने शहादत प्राप्‍त की। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। ‘इक्‍कीस’ की रिलीज से पहले अब शहीद अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल ने फिल्‍म का रिव्‍यू किया है। श्रीराम राघवन ने मुकेश के लिए फिल्‍म की स्‍पेशल स्‍क्रीनिंग रखी थी। मुकेश इस दौरान भावुक हो गए।

सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की हिम्मत, बहादुरी और शहादत को श्रद्धांजलि फिल्म ‘इक्कीस’, अगस्त्य नंदा की बड़े पर्दे पर पहली फिल्‍म है। वह इससे पहले जोया अख्‍तर की ‘द आर्चीज’ से एक्‍ट‍िंग डेब्‍यू कर चुके हैं, लेकिन यह ‘नेटफ्ल‍िक्‍स’ पर रिलीज हुई थी। ‘इक्‍कीस’ से अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया भी डेब्‍यू कर रही हैं। जबकि दिवंगत धर्मेंद्र की यह आख‍िरी फिल्‍म है।

‘इक्कीस’ देख बोले मुकेश खेत्रपाल- मैं रोना बंद नहीं कर पाया

‘इक्कीस’ देखने के बाद अरुण खेत्रपाल के भाई मुकेश खेत्रपाल काफी भावुक नजर आए। उन्‍होंने फिल्म निर्माता श्रीराम राघवन से बात करते हुए कहा, ‘मेरी शिकायत यह है कि आपने मुझे रुला दिया। आपने मुझे कुछ ऐसी बातें फिर से याद दिला दीं, जो मेरे दिमाग में थीं और पल-पल, जब मैंने इसे स्क्रीन पर देखा, तो मैं इतना भावुक हो गया कि मैं रोना बंद नहीं कर पाया।’

‘इक्‍कीस’ की फिल्‍म समीक्षा में बोले- ये ट्रेलर से 100 गुना बेहतर

‘इक्‍कीस’ की फिल्‍म समीक्षा करते हुए मुकेश खेत्रपाल ने आगे कहा, ‘अब जब मैंने फिल्म देख ली है, तो मैं यह जरूर कहूंगा कि हमने फिल्म का जो ट्रेलर देखा, यह मूवी उससे 10 गुना या शायद 20 गुना या 100 गुना बेहतर है। ओह, शानदार।’

अगस्‍त्‍य नंदा को गले लगाकर कहा- आप जिंदगीभर अरुण रहेंगे

मुकेश खेत्रपाल ने फिल्‍म में सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाने वाले अगस्त्य नंदा की भी तारीफ की। कहा, ‘आप दुनिया के लिए जो भी हों, आप जिंदगीभर अब अरुण ही रहेंगे। कोई आपसे यह छीन नहीं सकता। बहुत बढ़िया।’ यह कहते हुए उन्होंने अगस्त्य को गले लगा लिया।

मुकेश छाबड़ा ने भी किया ‘इक्‍कीस’ का रिव्‍यू

इसके पहले कास्‍ट‍िंग डायरेक्‍टर मुकेश छाबड़ा ने भी सोशल मीडिया पर ‘इक्कीस’ का ‘ईमानदारी’ से रिव्यू किया था। उन्होंने लिखा, ‘अभी-अभी ‘इक्कीस’ देखी – एक ऐसी फिल्म जो पूरी तरह दिल से बनाई गई है। कोमल, ईमानदार कहानी जो खत्म होने के बाद भी आपके साथ रहती है। धर्मेंद्र सर… क्या ग्रेस है, क्या गहराई है। अगर यह आपकी आखिरी फिल्म है, तो यह सच में दिल तोड़ देती है। आपने हमें कुछ बहुत ही भावुक और महत्वपूर्ण दिया है। आपको याद किया जाएगा, सर। और जयदीप अहलावत – हैट्स ऑफ। मुझे सच में इसकी उम्मीद नहीं थी, मुझे सरप्राइज होकर खुशी हुई।’

अगस्‍त्‍य नंद और सिमर भाटिया की तारीफ

मुकेश छाबड़ा ने अगस्‍त्‍य नंदा के लिए आगे लिखा, ‘अगस्त्य नंदा और सिमर भाटिया का गर्मजोशी से स्वागत है। दोनों स्क्रीन पर बहुत अच्छे लगे। प्यारी आंखें, शानदार केमिस्ट्री। अगस्त्य की मासूमियत और ईमानदारी सच में चमकती है। विवान शाह और सिकंदर खेर का खास जिक्र बनता है, बेहतरीन काम। और सबसे ऊपर श्रीराम राघवन। द मैन। द मास्टर। एक दिल को छू लेने वाली फिल्म, ईमानदारी से बनाई गई। ऐसा सिनेमा जो अपना सा लगता है।’

अमिताभ बच्‍चन ने किया ‘इक्‍कीस’ का रिव्‍यू

करीब एक हफ्ते पहले भी ‘इक्‍कीस’ की स्‍पेशल स्‍क्रीनिंग रखी गई थी। तब अमिताभ बच्‍चन ने अपने नाती की फिल्‍म देखकर ब्‍लॉग लिखा था। उन्‍होंने ‘इक्‍कीस’ का रिव्‍यू करते हुए कहा, ‘जब मैंने नाती को ‘इक्कीस’ में बेहतरीन काम करते देखा… वह समय जब उसकी मां, श्वेता को ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया जा रहा था, क्योंकि उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी… उसका जन्म… कुछ ही घंटों बाद उसे गोद में लेना, और इस बात पर चर्चा करना कि क्या उसकी आंखें नीली थीं… उस समय तक जब वह थोड़ा बड़ा हुआ और उसे अपनी बाहों में लिया, और वह मेरी दाढ़ी से खेलता था… उसके बड़े होने तक… एक्टर बनने के उसके निजी फैसले तक, और आज रात उसे फ्रेम में देखना। जब भी वह फ‍िल्म के फ्रेम में आता है तो मैं उससे नजरें नहीं हटा पाता।’

बिग बी बोले- कुछ बनावटी नहीं, बस अरुण खेत्रपाल

अमिताभ बच्‍चन ने आगे लिखा, ‘उसकी मैच्योरिटी, उसके परफॉर्मेंस में बिना मिलावट वाली ईमानदारी, उसकी मौजूदगी उस किरदार को सही ठहराती है जिसे वह निभाता है… कुछ भी बनावटी या दिखावटी नहीं, बस अरुण खेत्रपाल सैनिक, जिसने 21 साल की उम्र में अपनी बहादुरी से 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश की रक्षा की… कुछ भी ज्यादा नहीं, बस हर शॉट में परफेक्शन… जब वह फ्रेम में होता है तो आप सिर्फ उसे ही देखते हैं… और यह कोई नाना नहीं बोल रहा है, यह सिनेमा का एक अनुभवी दर्शक बोल रहा है।’