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गाजीपुर: केंद्रीय मंत्री ने पेट्रोल पंप का ऑफर दिया तो अपने दौर के मशहूर कम्युनिस्ट नेता सरजू पांडेय ने कहा कि लोग कहेंगे कथनी और करनी में फर्क है। वह यह कलंक नहीं लगने देंगे। यह कहकर उन्होंने पेट्रोल पंप के लाइसेंस हासिल करने के प्रस्ताव को सहज भाव से ठुकरा दिया था। तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू ने मंत्री पद ऑफर किया तो विनम्रता से उसे प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। पूर्वांचल के इस लौह पुरुष ने 30 साल के सार्वजनिक जीवन खुद के लिए कोई संपत्ति नहीं जोड़ी। आज 19 नवंबर को उनकी 106वीं जयंती पर पूरा जनपद उन्हें याद कर रहा है।

स्वतंत्रता संग्राम में सरजू पांडेय को 42 वर्ष की सजा हुई थी। जिला मजिस्ट्रेट के 4 अगस्त 1973 के प्रमाण पत्र के अनुसार उन्होंने साढ़े तीन साल कैद और 15 बेत की सजा काटी। गाजीपुर, बस्ती, वाराणसी और लखनऊ जेलों में रहे। आजादी के बाद अलग-अलग राजनीतिक मुकदमों में छह साल और जेल काटी। कुल मिलाकर उन्होंने नौ साल काल कोठरी में बिताए।सरजू पांडेय पर केंद्रित एक लेख में प्रगतिशील लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे साहित्यकार स्वर्गीय डॉ पीएन सिंह ने लिखा है कि सरजू पांडेय ने 1937 में स्वामी सहजानंद सरस्वती से पाली गांव में मुलाकात के बाद उन्होंने किसान मजदूर आंदोलन को नई धार दी थी। 1957 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट पर एक साथ रसड़ा लोकसभा और मुहम्मदाबाद विधानसभा जीतकर इतिहास रचा था। नेहरू के करीबी और कांग्रेस के बड़े नेता शौकतउल्लाह अंसारी को उन्होंने हराया था। संसद में तत्कालीन पीएम नेहरू ने पूछा ये सरजू पांडेय कौन हैं जो दो-दो सीटें जीत लाए? पीछे की बेंच से सरजू पांडेय ने हाथ उठाकर कहा ‘मैं हूं’।वह चार बार लोकसभा पहुंचे। इसके साथ ही वह 10 वर्षों तक एमएलसी रहे। नेहरू ने कांग्रेस जॉइन करने और मंत्री बनने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह समाज में गैर बराबरी मिटाने की लड़ाई लड़ रहे है। उन्हें किसी भी पद की लालसा नहीं है। हर साल गाजीपुर कचहरी परिसर स्थित सरजू पांडेय पार्क में उनकी जयंती धूमधाम से मनाई जाती है। सरजू पांडेय स्मृति न्याय समिति के सचिव ऋषि पांडेय ने बताया कि इस साल भी शिक्षा जगत के विद्वान और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।