प्रयागराज: इलहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर पुलिस की भाषा पर ऐतराज जताते हुए नसीहत दी कि कब्जा चल-अचल संपत्ति का होता है, इंसानों का नहीं। पुलिस ने एक मामले में अपने मेमो में युवती को हिरासत में लेने के लिए कब्जा शब्द का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता युवती बालिग है और उसने कहा है कि वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है न कि अपने माता-पिता के साथ। इसलिए वह बालिग होने के नाते अपनी मर्ज़ी से कहीं भी जा सकती है और जिसके साथ रहना चाहती है उसके साथ रह सकती है
इलाहबाद हाई कोर्ट मुज़फ्फरनगर से जुड़े मामले में एक युवती द्वारा दाखिल हैबियस कार्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने अपने फैसले में युवती को पलिस द्वारा हिरासत को ‘कब्ज़ा’ (Possession) में लेने के तौर पर रिकॉर्ड करने के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की।



