वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में साथ न देने के लिए NATO सहयोगियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नाटो को एक बार फिर कागजी शेर कहकर संबोधित किया और कहा कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन इससे बिल्कुल नहीं डरते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी इच्छा फिर से जाहिर की। ट्रंप की ये टिप्पणियां तब आई हैं, जब इसी सप्ताह के आखिर में NATO के चीफ मार्क रुटे वॉशिंगटन आने वाले हैं।
ट्रंप ने सोमवार को कहा, "देखिए हम नाटो के पास गए थे। मैंने बहुत जोर देकर नहीं पूछा था। मैंने बस इतना कहा था, अगर आप मदद करना चाहते हैं तो बहुत बढ़िया।" ट्रंप ने बताया कि नाटो की तरफ से उन्हें कहा गया, नहीं, नहीं, नहीं, हम मदद नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी बात किससे हुई थी।
नाटो पर साथ न देने का आरोप
ट्रंप ने आगे कहा कि नाटो सदस्यों ने असल में उनकी मदद न करने के लिए हर संभव कोशिश की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्ध ने NATO को लेकर उनके मन पर ऐसा निशान छोड़ दिया है जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रंप ने कहा, ‘नाटो एक कागजी शेर है, जिससे पुतिन नहीं डरते।’ राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि NATO के साथ मतभेद तब शुरू हुए, जब उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने की इच्छा जाहिर की।
नाटो अब समर्थन देना चाह रहा- ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि नाटो के देश अब उनसे जुड़ने और समर्थन देने की कोशिश कर रहे हैं, जब अमेरिका पहले ही युद्ध जीत चुका है। उन्होंने कहा, वे (NATO) मुझसे मिलने आ रहे हैं। साथ ही यह भी जोड़ा कि अचानक वे अब मदद भेजना चाहते हैं। ट्रंप का बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बैकचैनल बातचीत हो रही है। ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 10 पॉइंट का प्लान भेजा है।
ट्रंप की टिप्पणी केवल नाटो तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ईरान युद्ध में मदद न करने के लिए दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे अन्य पारंपरिक गैर-NATO सहयोगियों की भी आलोचना की। वहीं, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, कतर और UAE जैसे खाड़ी देशों की तारीफ की।



