नई दिल्ली, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लड़ने का एक खतरनाक और सस्ता युद्ध मॉडल अपनाया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की तरफ से 800 से ज्यादा ड्रोन भारतीय हवाई सीमा में भेजे गए। इसे लो लेवल ड्रोन वारफेयर (कम ऊंचाई पर ड्रोन युद्ध) कहा जाता है।
सूत्र बताते हैं कि यह सिर्फ इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं हैं, बल्कि भारत की एयर डिफेंस और एंटी ड्रोन शील्ड परखने की सैन्य रणनीति का संकेत है। ये ड्रोन कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिससे रडार को चकमा दे सकते हैं।
ज्यादातर ड्रोन राजस्थान और पंजाब की सीमा पर देखे गए। भारतीय सुरक्षा बलों ने 800 में से करीब 240 ड्रोन मार गिराए। 5 ड्रोन में हथियार या युद्ध से जुड़ा सामान मिला। 160 से ज्यादा ड्रोन दूसरे सामान गिराने के लिए आए थे, जबकि करीब 72 ड्रोन नशीले पदार्थ लेकर आए थे। इस साल जनवरी में अब तक ड्रोन घुसपैठ की 12 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
आतंकियों की मदद को सर्विलांस
- सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर ड्रोन सर्विलांस करने आए थे। इनका मकसद भारतीय सेना की तैनाती और उसका पैटर्न पता लगाना था। पाकिस्तान ऐसे सर्विलांस से आतंकियों की घुसपैठ के रास्ते खोजता रहा है।
- सैन्य संचालन- महानिदेशक स्तर पर हॉटलाइन पर होने वाली वार्ता में भारत ने ड्रोन एक्टिविटी पर आपत्ति दर्ज कराई है। एहतियात के तौर पर भारतीय सेना और वायु सेना काउंटर ड्रोन सिस्टम खरीद रही हैं।
- सेना स्वदेशी – डिफेंस कंपनी आईजी डिफेंस से हैंडहेल्ड एंटी ड्रोन जैमर खरीदेगी। डीआरडीओ द्वारा तैयार 16 एंटी ड्रोन लेजर सिस्टम खरीदे जा रहे हैं। ये पाक सीमा और एलओसी पर तैनात किए जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर- 2 हफ्तों में बॉर्डर पर ड्रोन की 5 घटनाएं
राजस्थान और पंजाब बॉर्डर के अलावा जम्मू-कश्मीर में पिछले 2 हफ्तों मे LoC के पास पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने की पांच घटनाएं हो चुकी हैं। ड्रोन देखे जाने के बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने एंटी ड्रोन सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया था। इसके बाद ड्रोन पाकिस्तान की ओर लौट गए थे।
20 जनवरी को कठुआ जिले में नियमित निगरानी के दौरान नजर आया था। इससे पहले 17 जनवरी को रामगढ़ सेक्टर में, 15 जनवरी को भी रामगढ़ सेक्टर में एक बार, 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार और 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर, धरमसाल सेक्टर, रियासी, सांबा और पुंछ के मंकोट सेक्टर में एकसाथ पांच ड्रोन स्पॉट किए गए थे।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए LoC पर निगरानी और चौकसी और बढ़ा दी गई है। सेना और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।



