इस्लामाबाद: भारत ने बीते साल पाकिस्तान को ऐसी चोट दी थी जिसे लेकर इस्लामाबाद आज तक तिलमिला रहा है। यह कदम सिंधु जल संधि को लेकर था जिसे भारत ने पहलगाम आंतकी हमले के बाद रोक दिया था। भारत के फैसले पर पाकिस्तान जिस तरह से घबराहट में है, ऐसी उसके अंदर दशकों में नहीं देखी गई है। इस्लामाबाद ने दुनिया भर के मंचों से अपनी इस घबराहट का जाहिर किया है। पिछले 8 महीने से ज्यादा समय में इस्लामाबाद ने जो कुछ किया है, वह दिखाता है कि पाकिस्तान किस गहराई तक सिंधु नदी के पानी की पहुंच पर निर्भर है।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी हमले में 26 नागरिकों के मारे जाने के एक दिन बाद 23 अप्रैल 2025 को भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। संधि के स्थापित होने के बाद 60 सालों में पहली बार इसे रोका गया था। भारत ने साफ संदेश दिया कि खून (आतंकवाद) और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
पाकिस्तान की घबराहट की वजह क्या है?
पाकिस्तान सिंधु नदी के पानी पर बहुत अधिक निर्भर है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को देश का खाद्यान्न गोदाम कहा जाता है। इस इलाके में 80 से 90 प्रतिशत खेती भारत से जाने वाले पानी पर निर्भर है। पाकिस्तान की पानी रोकने की क्षमता बहुत कम है और यह केवल 30 दिनों तक के लिए पर्याप्त है। ऐसे में पानी पाकिस्तान के लिए बड़ा आर्थिक खतरा बन गया है।
भारत के खिलाफ नैरेटिव की जंग
सिंधु नदी के साथ ही पाकिस्तान ने झेलम और नीलम नदी में असामान्य प्रवाह का दावा किया है और इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के तहत गठित आयोग के जरिए भारत से इस बारे में आपत्ति जताई है। इसके अलावा पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक नैरेटिव अभियान शुरू किया है। इस्लामाबाद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महासभा, इस्लामिक सहयोग संगठन, SCO और वर्ल्ड बैंक तक को पत्र लिखा है। इन पत्रों में सिंधु जल संधि पर रोक के भारत के फैसले पर आपत्ति जताई है और इसे पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों की जान के लिए खतरा बताया है।



