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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और सैन्य प्रमुख असीम मुनीर अमेरिका से संबंधों को साधने की कोशिश में अपने घर में घिरते जा रहे हैं। पाकिस्तानी आर्मी के गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में शामिल होने पर आम लोग नाखुश दिख रहे हैं। दूसरी ओर पाकिस्तानी नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए इसमें सेना भेजना चाहता है। ऐसे में शरीफ और मुनीर ने बीच का रास्ता निकालते हुए डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर पाकिस्तान को कुछ वक्त देने के लिए कहा है।

दावोस में हुई हाई-लेवल बातचीत से जुड़े टॉप सिक्योरिटी सूत्रों के हवाले से CNN-News18 ने बताया है कि पाकिस्तान ने गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) के हिस्से के तौर पर सैनिक भेजने की इच्छा जताई है। साथ ही अपनी घरेलू मजबूरियों को भी ट्रंप के सामने रखा है। मुनीर और शरीफ की ओर से ISF के ऑपरेशनल रोडमैप के साथ-साथ घरेलू माहौल तैयार करने के लिए ट्रंप से समय मांगा गया है।

दावोस में बैठकों का दौर

सूत्रों ने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर पाकिस्तानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई कई मीटिंग में ISF का मुद्दा प्रमुखता से उठा है। पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सीडीएफ असीम मुनीर तो वहीं अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो बैठक का हिस्सा रहे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान शामिल हुआ है। वहीं गाजा में सेना भेजने पर भी पाकिस्तान राजी होता दिख रहा है। पाकिस्तान के विपक्षी दल, सामाजिक संगठन और आम लोग इसे इजरायल के साथ एक मंच पर आना और फिलिस्तीनियों के साथ धोखे की तरह देख रहे हैं। ऐसे में सरकार के रुख पर देश में गुस्सा बढ़ रहा है।

ट्रंप को घरेलू विरोध का हवाला

दावोस में बातचीत के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिकी अफसरों से कहा कि वह बाद गाजा में स्थिरता और मानवीय सहायता के लिए बनाई जाने वाली अंतरराष्ट्रीय सेना में सैनिक भेजने के लिए तैयार है। इसमें पाकिस्तान को कमांड स्ट्रक्चर के बारे में स्पष्टता चाहिए। साथ ही गाजा को लेकर घरेलू संवेदनशीलता को देखते हुए देश में माहौल बनाने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।

सूत्रों ने संकेत दिया कि कई प्रस्तावों का पहले ही बातचीत हो चुकी है और ये जुड़ाव आगे भी जारी रहेगा। गाजा ISF और प्रस्तावित अमेरिका-पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत का अगला दौर फरवरी या मार्च में होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष राजनीतिक और क्षेत्रीय बाधाओं से निपटते हुए बात आगे बढ़ाएंगे।