जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका तभी तक अन्य देशों का दोस्त है जब तक उसका फायदा हो। वह अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिफ मुनीर को व्हाइट हाउस में लंच के लिए बुलाया था। इस पर मीडिया ने उमर से सवाल किया तो उन्होंने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी मर्जी के मालिक हैं। हम उन्हें नहीं बता सकते कि वे किसे लंच पर बुलाएं और किसे नहीं।
उमर ने कहा- यह अलग बात है कि हम सोचते थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमारे (भारत के) बहुत खास दोस्त हैं और वे हमारी दोस्ती का ख्याल रखेंगे। लेकिन जाहिर है अमेरिका वही करता है जिससे उसे फायदा हो। उन्हें किसी अन्य देश की परवाह नहीं है।
उमर बोले- लोगों को रातों-रात ईरान से नहीं ला सकते
ईरान-इजराइल युद्ध पर उमर ने कहा कि यह बंद होना चाहिए और बातचीत के जरिए इसका समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यह बमबारी शुरू नहीं होनी चाहिए थी। जब अमेरिकी खुफिया विभाग के चीफ से पूछा गया था कि क्या ईरान के पास परमाणु बम है, तो उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान बम बना सकता है। लेकिन इजराइल ने कुछ महीनों के अंदर ही ईरान पर हमला कर दिया।’
ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी स्टूडेंट्स के बारे में उन्होंने कहा कि हम उन्हें रातों-रात वापस नहीं ला सकते। एयरपोर्ट और और बंदरगाह बंद हैं। हम पहले उन्हें सड़क के रास्ते उन शहरों में ला रहे हैं जहां बमबारी नहीं हुई है, फिर उन्हें आर्मेनिया के रास्ते वापस लाया जा रहा है।
PAK आर्मी चीफ मुनीर अमेरिका गए थे, 18 जून को ट्रम्प से बंद कमरे में मिले थे
ट्रम्प ने 18 जून को व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर से बंद कमरे में मुलाकात की थी। दोनों ने कैबिनेट रूम में साथ लंच किया था। यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ की मेजबानी की।
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने बताया था कि मुनीर ने ट्रम्प को मई में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का क्रेडिट दिया है। उनके इस बयान के सम्मान में ट्रम्प ने उन्हें लंच पर बुलाया था।
ट्रम्प से उनकी मुलाकात से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से 35 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान मोदी ने साफ कहा था कि 7 से 10 मई तक चले ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच बातचीत के बाद सीजफायर हुआ था। किसी बाहरी मध्यस्थता के माध्यम से नहीं।



