एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने खुलकर बताया है कि उनकी मां श्रीदेवी के निधन ने उनके जीवन पर कितना गहरा असर डाला है। उन्होंने याद किया कि श्रीदेवी को अक्सर घर तोड़ने वाली कहा जाता था, लेकिन वह अपने बच्चों को हर तरह की नकारात्मकता से बचाती थीं और उन्हें अपने संघर्षों के बारे में नहीं बताती थीं। जाह्नवी कपूर ने यह भी बताया कि वह अपनी मां पर कितनी निर्भर थीं और श्रीदेवी के निधन के बाद उन्होंने अपने पिता बोनी कपूर को भी खो दिया।
राज शमानी के साथ हाल ही में हुई बातचीत में जाह्नवी कपूर ने श्रीदेवी के एक पुराने और भावुक इंटरव्यू को याद किया, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में अपने संघर्षों के बारे में बात की थी। जाह्नवी ने कहा, ‘मैंने उनका वो सफर देखा है। जब वह जीवित थीं, तब लोग उनके प्रति दयालु नहीं थे। उन्हें घर तोड़ने वाली और न जाने क्या-क्या कहा जाता था। इन सब बातों का उन पर गहरा असर पड़ा और उन्हें बुरा लगा, लेकिन इतिहास गुजर चुके लोगों के प्रति दयालु होता है।’
श्रीदेवी को लेकर बोलीं जान्हवी कपूर
जब उनसे पूछा गया कि अब वह अपनी मां को क्या कहना चाहेंगी, तो उन्होंने कहा, ‘अब मैं उन्हें समझती हूं। और मुझे अफसोस है कि मैं उन्हें पहले नहीं समझ पाई। उनका नजरिया मुझसे बिल्कुल अलग था, जब मैं बच्ची थी तब चीजों को देखने के तरीके से बिल्कुल अलग था। उन्होंने चार साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने संघर्षों की कहानियां हमसे शेयर नहीं कीं। वह सिर्फ खुशियों भरी कहानियां सुनाती थीं।’
श्रीदेवी के सदमे से उबर नहीं पाईं
जान्हवी कपूर ने अपने दुख के बारे में खुलकर बात की और कहा कि उन्होंने अभी तक अपने सदमे से उबर नहीं पाई हैं।
मां पर निर्भर बेटी थीं जान्हवी कपूर
उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत ही आश्रित बेटी थी। मैं अपने फैसले खुद नहीं लेती थी। मैं उन पर निर्भर रहती थी। मुझे क्या पहनना चाहिए? मुझे क्या सोचना चाहिए? क्या सही है और क्या गलत? सब कुछ। तो अचानक दुनिया के बीच अपने फैसले खुद लेना, जब दुनिया मेरे टुकड़े-टुकड़े कर रही हो, परिवार के रिश्तों पर आरोप लगा रही हो। मैं उनके पास जाती थी।’
मां के साथ पिता को भी खो दिया- जान्हवी
उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी मां को खोने के दर्द से उबर नहीं पा रही हूं। उनके जैसी कोई नहीं है। मुझे उनकी हंसी-मजाक की बहुत याद आती है। मुझे याद आता है कि उन्होंने मुझे, मेरी बहन और मेरे पिता को कैसा बनाया। मैंने उस दिन सिर्फ एक पैरेंट को नहीं खोया, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया, उनका वह रूप जो उनके साथ रहते हुए मौजूद था।’



