भोपाल: भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और ‘अबोल’ की स्थिति के बीच एक नन्हे परिंदे ने मानवता और सहयोग की नई मिसाल पेश की है। रायसेन जिले के हलाली डैम से जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर छोड़ी गई एक मादा ‘काला गिद्ध’ पाकिस्तान में घायल हो गई है, जिसकी जान बचाने के लिए दोनों देशों के वन्यजीव अधिकारियों ने आपसी सहयोग का हाथ बढ़ाया है।
घायल होने से हलाली डैम तक का सफर
करीब दो वर्ष की इस मादा गिद्ध को पहली बार 22 जनवरी 2026 को शाजापुर जिले के सुसनेर रेंज में घायल पाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद इसे भोपाल के वन विहार स्थित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (वीसीबीसी) लाया गया। वैज्ञानिकों की देखरेख में इसे पूरी तरह स्वस्थ किया गया और लंबी उड़ान का प्रशिक्षण दिया गया। 25 मार्च को इसमें जीपीएस जीएसएम ट्रैकिंग डिवाइस फिट की गई और 30 मार्च को इसे हलाली डैम से मुक्त कर दिया गया।
पाकिस्तान में रेस्क्यू और उपचार
निगरानी दल के अनुसार, यह गिद्ध राजस्थान के रास्ते होते हुए 6 अप्रैल को पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुआ। 7 अप्रैल को अचानक सिग्नल टूटने पर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने तुरंत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-पाकिस्तान से संपर्क किया। गहन खोजबीन के बाद पता चला कि गिद्ध पाकिस्तानी पंजाब के खानेवाल जिले के एक खेत में गिरा पड़ा है। माना जा रहा है कि इलाके में आए भीषण तूफान की वजह से वह घायल हुआ। स्थानीय प्रशासन और वन्यजीव टीम ने उसे सुरक्षित बचाकर उसका इलाज शुरू कर दिया है।
उड़ान की अद्भुत क्षमता
राज्य वन्य जीव बोर्ड के सदस्य और विशेषज्ञ दिलशेर खान बताते हैं कि काला गिद्ध मूलतः यूरेशिया का पक्षी है। ये परिंदे मंगोलिया, कोरिया और तुर्की जैसे देशों से होते हुए भारत-पाकिस्तान और हिमालयी क्षेत्रों तक प्रवास करते हैं। इनकी उड़ान भरने की क्षमता इतनी अधिक होती है कि ये हजारों किलोमीटर का सफर आसानी से तय कर लेते हैं।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल गिद्ध की हालत स्थिर है और वह सामान्य रूप से आहार ले रहा है। हालांकि, वह अभी स्वतंत्र रूप से लंबी उड़ान भरने या शिकार करने की स्थिति में नहीं है। दोनों देशों के अधिकारी लगातार इसकी रिकवरी पर नजर बनाए हुए हैं।



