रायपुर, रायपुर के खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री में बाल श्रमिकों के शोषण की घटना को 28 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक रेस्क्यू करने वाले जिम्मेदार अफसरों के बयान दर्ज नहीं किए गए। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो पाई है और न ही दोषियों के खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकी है।
केस की विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, रेस्क्यू करने वाले एनजीओ के अधिकारी अपना बयान दर्ज कराने उपस्थित नहीं हो रहे है। वहीं एनजीओ के जिम्मेदारों का कहना है कि, रेस्क्यू के बाद थाना जाकर पत्राचार कर चुके है। 17 दिसंबर को थाने जाकर दस्तावेज दिए है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, रायपुर के खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री में 17 नवंबर को 109 बाल मजदूरों के रेस्क्यू कराया गया था। एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (AVA) और बजरंग दल की शिकायत के बाद दिल्ली से आई मानवाधिकार आयोग की टीम, महिला बाल विकास विभाग और पुलिस ने छापेमारी कर बाल मजदूरों का रेस्क्यू किया था।
इनमें 68 बच्चियां और 41 बच्चे शामिल थे। इस मामले में अब तक एफआईआर नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, मामले में बाल आयोग और श्रम विभाग के कार्रवाई संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य नहीं दिए जाने से जांच अटकी हुई है।
10–15 बच्चों को एक ही कमरे में रखा जाता था
मानवाधिकार आयोग की टीम ने रेस्क्यू किए गए बच्चों को माना में रखा था। माना स्थित केंद्र पहुंची दैनिक भास्कर की टीम को बच्चों ने बताया कि, एक कमरे के अंदर 10 से 15 लोगों को रखा जाता था। उनके साथ मारपीट होती थी।
उन्हें सुबह 4-5 बजे उठाकर देर रात तक काम करवाया जाता था। खाना सिर्फ दो वक्त दिया जाता था। काउंसलिंग के दौरान पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चों में कुछ वही हैं, जिन्हें जुलाई में भी बचाया गया था। ठेकेदारों ने उन्हें फिर से काम दिलाने के नाम पर यहां लाकर फंसा दिया।
खतरनाक केमिकल के बीच रह रहे थे बच्चे
रेस्क्यू टीम के अधिकारियों ने बताया था कि, जब टीम फैक्ट्री के अंदर पहुंची तो सभी बच्चे अलग-अलग कामों में लगे हुए थे। कोई मिट्टी डाल रहा था, कोई पैकिंग कर रहा था, कोई बर्फ की सिल्ली उठा रहा था और कुछ बच्चे उन पर केमिकल छिड़कने का काम कर रहे थे।
टीम के सदस्यों ने बताया कि, वहां उपयोग होने वाला फॉर्मोलीन केमिकल इतना जहरीला था कि पास जाने पर आंखों में जलन होने लगी। अगर ये बच्चे लंबे समय तक इसके संपर्क में रहते, तो उन्हें गंभीर बीमारियां जिसमें कैंसर तक भी हो सकता था।
मोजों मशरूम कंपनी के बारे में जानिए
मोजो मशरूम फैक्ट्री का असली नाम मारूति फ्रेश फर्म है। मारूति फ्रेश फर्म को ही खरोरा इलाके में मोजो मशरूम के नाम से जाना जाता है। ये फैक्ट्री खरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित उमा श्री राइस मिल कंपनी के परिसर में संचालित हो रही है।
श्रम विभाग के दस्तावेजों में इस मारूति फ्रेश कंपनी के नियोजक राण विश्व प्रताप सिंह को बताया गया है। उनके नाम के आगे पार्टनर लिखा हुआ है। यहां पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या 100 बताई गई है। राजेंद्र तिवारी को इस फैक्ट्री का लीगल एडवाइजर बताया जा रहा है।
AVA ने इनके खिलाफ शिकायत दी
AVA के राज्य संयोजक ने अशोक, सुदामा, नोहर, विकास, चंदन, अभी, वंशी, बुद्धदेव सहित अन्य पर बलपूर्वक नाबालिगों से काम कराने की शिकायत की है। राज्य संयोजक ने मोनिका खेतान, विमल खेतान और विश्वप्रताप सिंह राणा को फर्म का संचालक बताया है।
इस शिकायत की कॉपी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो, रायपुर कलेक्टर गौरव कुमार सिंह, रायपुर एसएसपी डॉ लाल उम्मेद सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर की जिला अधिकारी और एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन नई दिल्ली के निदेशक मनीष शर्मा को भी दी गई है।
अब पढ़िए पुलिस ने क्या कहा ?
रायपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) वीरेंद्र चतुर्वेदी से दैनिक भास्कर की टीम को बताया कि, मामले में जांच की जा रही है। श्रम और बाल आयोग के अधिकारियों से कार्रवाई का दस्तावेज साक्ष्य मांगा गया है। मोजो मशरूम फैक्ट्री से बच्चों का रेस्क्यू करने वाले सभी अधिकारी और सदस्यों का इसमें बयान होना है। अधिकारियों और बच्चों के बयानों और साक्ष्य के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



