सूरजपुर, बलौदाबाजार, रायगढ़, छत्तीसगढ़ के 3 अलग-अलग जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने आई है। पहला मामला बलौदाबाजार जिले का है जहां समय पर इलाज नहीं मिलने से एक गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। मामला लवन थाना क्षेत्र का है।
दूसरा मामला सूरजपुर जिले का हैं जहां गर्भवती महिला ने अस्पताल के फर्श पर बच्चे को जन्म दिया। भटगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए आई महिला 4 घंटे तक दर्द से तड़पती रही। हॉस्पिटल में न नर्स मिली, न ही ड्यूटी डॉक्टर। मजबूरन सास ने फर्श पर ही असुरक्षित तरीके से प्रसव करवाया।
वहीं, तीसरा मामला रायगढ़ जिले का है। जहां खराब सड़क के कारण बीमार पत्नी को उठाकर पति लगभग 1 किलोमीटर तक पैदल चला। पड़ोसी की मदद से पति ने कीचड़ से भरी सड़क को पार किया। बाद में जब साफ रास्ता मिला, तो ऑटो से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया। मामला कापू थाना क्षेत्र का है।
बलौदाबाजार में मां-गर्भस्थ शिशु की मौत
जिले के लवन में रहने वाली संतोषी साहू (34 साल) की डिलीवरी का समय आ गया था। रविवार (10 अगस्त) की रात परिजन सबसे पहले उसे पलारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां उन्हें 5 घंटे तक बिना इलाज के रखा गया।
डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में भी 3 घंटे तक कोई सर्जन नहीं आया। वहां केवल दो इंजेक्शन लगाए गए। जब संतोषी की हालत बिगड़ी, तो सर्जन ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें चंदा देवी निजी अस्पताल भेज दिया गया। चंदा देवी अस्पताल ने महज आधे घंटे में 3000 रुपए का बिल बनाकर उन्हें रायपुर के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में उन्हें पलारी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सूरजपुर में अस्पताल के फर्श पर बच्चे का जन्म
भैयाथान ब्लॉक के ग्राम असना ढोढ़ी की रहने वाली कुंती बाई (30) को शनिवार (9 अगस्त) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने गांव की मितानिन से संपर्क किया। पता चला कि वह रायपुर में है। मितानिन ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भटगांव में ले जाने की सलाह दी।
4 घंटे तड़पती रही प्रसूता, फर्श पर प्रसव
सास इंजोरिया बाई बहू को लेकर हॉस्पिटल पहुंची। हॉस्पिटल में उसे डिलीवरी रूम में भेज दिया गया। प्रसव विभाग में जिस नर्स की ड्यूटी लगी थी, वह बिना पूर्व सूचना के गायब थी। उसका फोन भी बंद मिला। ड्यूटी डॉक्टर शीला सोरेन का भी फोन बंद मिला।
हॉस्पिटल में डॉक्टर और नर्स के नहीं होने के कारण प्रसूता कुंती बाई 4 घंटे तक दर्द से तड़पती रही। 4 घंटे बाद उसने हॉस्पिटल के फर्श पर ही नवजात को जन्म दिया। उसकी सास इंजोरिया ने प्रसूता की मदद करते हुए प्रसव कराया। फिर बच्चे को फर्श से उठाकर बेड पर रखा।



