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गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद में करीब पांच लाख से अधिक हाउस टैक्‍स देने वाले लोग रहते हैं। बढ़े हुए हाउस टैक्‍स को जमा करने की लास्‍ट डेट 31 मार्च है, लेकिन लोग दुविधा में फंसे हैं। दरअसल, एक तरफ नगर निगम के प्रचार वाहन लोगों से छूट के साथ बढ़ा हुआ हाउस टैक्‍स जमा करने की अपील कर रहा है, दूसरी ओर महापौर सुनीता दयाल का कहना है कि लोग तभी हाउस टैक्‍स जमा करें जब कम होने का आदेश आ जाए।महापौर का स्‍पष्‍ट कहना है कि शासन स्‍तर से गाजियाबाद का हाउस टैक्‍स कम होने में समय लगेगा। दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि छूट का लाभ लेने के लिए लोग 31 मार्च से पहले हाउस टैक्‍स जमा कर दें। यदि बढ़े हुए हाउस टैक्‍स का फैसला वापस होता है तो बढ़ी हुई धनराशि को आगे समायोजित कर दिया जाएगा।

200 से 300 प्रतिशत तक हुई बढ़ोत्‍तरी

दरअसल, हाउस टैक्स विवाद की शुरुआत वर्ष 2024 में हुई थी। उस समय नगर निगम ने टैक्स निर्धारण की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए शासन से नया टैक्स स्लैब पास करा लिया। इसके बाद मार्च 2025 से डीएम सर्किल रेट यानी जमीन की सरकारी कीमत को आधार बनाकर नई दरें लागू कर दी गईं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद हाउस टैक्स में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो गई। जिस फ्लैट का वार्षिक टैक्स पहले तीन से साढ़े तीन हजार रुपये होता था, वह बढ़कर सीधे 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंच गया। इससे खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ गया।

शासन स्‍तर पर रद्द हो चुका है बढ़ा हुआ हाउस टैक्‍स

इसके बाद 10 मार्च, 2026 को मेयर सुनीता दयाल लखनऊ पहुंचीं और शासन के सामने शहर के लोगों की नाराजगी और आर्थिक बोझ का मुद्दा रखा। चर्चा के बाद शासन ने बढ़ी हुई हाउस टैक्स दरों को रद्द कर दिया और पुरानी दरों पर ही टैक्स वसूली का फैसला लिया।

महापौर और नगर आयुक्‍त की अलग-अलग बातें

बीते 18 मार्च को कविनगर रामलीला मैदान में हुए कार्यक्रम में महापौर ने हाउस टैक्‍स नहीं बढ़ाने का आश्‍वासन दिया था। हालांकि उनके इस बयान का नगर आयुक्‍त और अन्‍य अफसरों का समर्थन नहीं है। अधिकारी लगातार जनता से अपील कर रहे हैं कि वे छूट के साथ बढ़ा हुआ हाउस टैक्‍स जमा कर दें।