नई दिल्ली: इस समय शाहरुख खान (Shahrukh Khan) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) काफी चर्चा में है। इस टीम ने एक बांग्लादेशी क्रिकेटर को IPL में लिया है। इस वजह से सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। हालांकि इस टीम (Kolkata Knight Riders’) के मालिकानों में शाहरुख खान के साथ साथ अभिनेत्री जूही चावला और उनके पति भी शामिल हैं। लेकिन निशाने पर सिर्फ शाहरुख ही हैं। कुछ लोग शाहरुख खान को ‘देशद्रोही’ तक कह रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि भारत और बांग्लादेश क कारोबारी रिश्ते अभी भी मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच कारोबार तो पहले के मुकाबले बढ़ा ही है।
कारोबारी रिश्ते टूटे ही नहीं
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Commerce & Industry) के ट्रेड डेटा इस हंगामे को शांत कर रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापारिक, आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते कभी टूटे ही नहीं थे। भले ही भारत ने बांग्लादेश पर कुछ पाबंदियां लगाई थीं, जैसे कि ट्रांशिपमेंट (सामान को एक जहाज से दूसरे जहाज में उतारना) की सुविधा और पोर्ट (बंदरगाह) तक पहुंच रोकना। सोशल मीडिया पर चल रहे शोर-शराबे और गालियों से परे, भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार और बिजनेस के असल आंकड़े एक गहरे और फायदेमंद रिश्ते की कहानी कहते हैं। यह रिश्ता तब भी कायम रहा, जब शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया था।
निर्यात बढ़ा है
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा 2 जनवरी, 2026 को अपडेट किए गए निर्यात और आयात के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में भारत का बांग्लादेश को निर्यात 11.48 अरब अमेरिकी डॉलर था। यह वित्त वर्ष 2024 के 11.06 अरब डॉलर से थोड़ा ज्यादा है। यह लगभग 3 से 4% की मामूली बढ़ोतरी दिखाता है। यह तब हुआ जब राजनीतिक तनाव, सीमा पर अनबन, वीजा-रास्ते-पोर्ट पर पाबंदियां और कूटनीतिक उठापटक का एक साल बीता। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में दो जनवरी तक भारत ने बांग्लादेश को करीब 4 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान निर्यात किया।
आयात-निर्यात किन वस्तुओं का
इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (जो वाणिज्य मंत्रालय द्वारा समर्थित एक ट्रस्ट है) ने अपनी फैक्टशीट में बताया कि वित्त वर्ष 25 में भारत ने बांग्लादेश को 5,069 तरह के सामान भेजे। इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, सूती धागा, अनाज, मशीनरी, गाड़ियां, दवाइयां और केमिकल शामिल थे। बदले में, भारत ने करीब 806 तरह के सामान आयात किए। इनमें तैयार कपड़े, जूट उत्पाद, चमड़े का सामान और कुछ खास कृषि उत्पाद थे। भारत का पलड़ा व्यापार में हमेशा भारी रहा है। ऐसा कोई संकेत नहीं है कि कोई देश अपने पड़ोसी का ‘बहिष्कार’ कर रहा हो।
भावनाओं से इतर है कारोबार
आंकड़े बताते हैं कि राजनीतिक असहजता के दौर में भी व्यापार खूब चला। सीमा प्रबंधन, पानी बंटवारे के झगड़े, अवैध प्रवासियों की चिंता और बांग्लादेश के अंदरूनी राजनीतिक हालात जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाला। फिर भी, व्यापार और वाणिज्य चलता रहा। यह सप्लाई चेन, भूगोल और आपसी आर्थिक फायदे की वजह से हुआ, न कि भावनाओं या ऑनलाइन दिखावे की वजह से। जानकार बताते हैं कि यह सुरक्षा या राजनीतिक चिंताओं को नजरअंदाज करने की बात नहीं है। यह एक याद दिलाता है कि भारतीय सरकार बांग्लादेश के साथ एक व्यावहारिक नजरिए से पेश आती है। वह भू-राजनीतिक सावधानी और आर्थिक जुड़ाव के बीच फर्क करती है। यह समझदारी उन डिजिटल भीड़ में गायब है जो एक फिल्म स्टार को एक फ्रेंचाइजी के क्रिकेटिंग फैसले के लिए निशाना बना रही है। यह फ्रेंचाइजी एक ग्लोबल स्पोर्ट्स सिस्टम का हिस्सा है।



