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तेहरान: ईरान में भारी विरोध प्रदर्शनों के बावजूद सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी है। विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए इस्लामिक नेतृत्व ने दमनकारी रवैया अपनाया है जिसमें हजारों लोग मारे गए हैं। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या 12000 के पार बताई गई है। इस बीच एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि विद्रोह को बेरहमी से कुचलने के बाद ईरान के कट्टरपंथी मल्ला दुनिया की शांति के लिए पहले से कहीं बड़ा खतरा बन सकते हैं। खासतौर पर जब डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामी नेतृत्व पर अपने तेवर नरम कर लिए हैं। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेतृत्व ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना को रद्द कर दिया है।

हालांकि, विश्लेषकों को डर है कि इस प्रदर्शन के बाद ईरान का नेतृत्व सहम गया है और उसने एक भयानक आखिरी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट द सन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को बढ़ाना जारी रखा है। एक्सपर्ट का कहना है कि पिछले साल जून में ईरान की परमाणु सुविधाओं पर अमेरिकी हमले में तेहरान का ज्यादातर परमाणु मैटेरियल बच गया था। यह संशोधित यूरेनियम लगभग आधा टन है।

इजरायल पर बड़े हमले की तैयारी

सन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान आगे चलकर इजरायल पर 2000 मिसाइलों से हमला करने की योजना बना रहा है, जो पिछले जून को 12 दिवसीय युद्ध को भी छोटा कर देगा। जून में हुए हवाई हमलों के दौरान ईरान ने लगभग 550 बैलिस्टिक मिसाइलें और 1000 से ज्यादा किलर ड्रोन लॉन्च किए थे, जिन्होंने इजरायल में भारी नुकसान पहुंचाया था।

चीन की मदद से अपग्रेड कर रहा मिसाइलें

ईरान से आने वाले 10 प्रतिशत से ज्यादा रॉकेट इजरायल के एयर डिफेंस शील्ड को भेदने में कामयाब रहे थे, जिसके चलते हजारों इजरायलियों को शेल्टर में छिपना पड़ा था। सबसे बड़ा हमला 200 बैलिस्टिक मिसाइलों का था, जिसमें तीन लोग मारे गए और 60 घायल हुए थे। हालांकि, अब ईरान जो तैयारी कर रहा है उसे रोकना इजरायल के लिए बहुत मुश्किल होगा। विश्लेषकों ने बताया कि ईरान चीनी तकनी की मदद से एक साथ दस गुना ज्यादा अपग्रेडेड बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

मिसाइलों की प्रोडक्शन लाइनें 24 घंटे चालू

ईरान के बार-बार परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में शमिल से इनकार करने के बाद तीसरे विश्व युद्ध का डर फिर से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरे देश में हिंसक प्रदर्शनों के बावजूद बैलिस्टिक मिसाइल प्रोडक्शन लाइनें 24 घंटे काम कर रही हैं। इजरायल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के डॉ. रज जिम्ट ने तीन दशकों तक ईरानी खतरों पर स्टडी की है। उन्होंने द सन को बताया कि अगर युद्ध के अगले दौर पहुंचते हैं, तो इजरायल सिर्फ मिलिट्री साइट्स या न्यूक्लियर फैसिलिटीज या मिसाइलों को ही निशाना नहीं बनाएगा। वे तेल प्रतिष्ठानों और खुद इस्लामिक शासन पर हमला करेंगे।

परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम

उन्होंने कहा कि ईरान चुप नहीं बैठेगा और मिसाइलों से जवाबी हमला करेगा। यह संघर्ष को क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों तक बढ़ा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म नहीं हुआ है। ईरान के पास कम से कम 400 किलोग्रम यूरेनियम है जो 60 प्रतिशत तक समृद्ध है। अगर से 90 प्रतिशत के सैन्य स्तर तक समृद्ध किया जाए तो 10 परमाणु बम बनाने के लिए काफी होगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने फिर से हमला किया तो तेहरान सारी हदें पार कर देगा।