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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोना-चांदी से लेकर शेयर बाजार तक में गिरावट देखने को मिल रही है। दुनिया के कई एक्सपर्ट वैश्विक मंदी की बात कर चुके हैं। ऐसे में काफी निवेशकों ने सोना, चांदी और इक्विटी जैसे जोखिम वाले एसेट्स से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया है और नकदी (कैश) को प्राथमिकता दे रहे हैं। बिजनेस टुडे के मुताबिक ऐसे में बाजार में इस समय कैश इज किंग (Cash is King) का माहौल बन गया है।

सोना-चांदी में बड़ी गिरावट

पिछले कुछ दिनों से सोना और चांदी में बड़ी गिरावट बनी हुई है। सोना और चांदी दोनों में जबरदस्त बिकवाली दर्ज की गई है। सोना अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 26% गिर चुका है, जबकि चांदी में और भी बड़ी गिरावट आई है। चांदी अपने ऑल-टाइम हाई से लगभग 52% टूट चुकी है और लगातार 9वें दिन गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है।

कल सोमवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी में 10 फीसदी से ज्यादा तक की गिरावट आई थी। दिन के कारोबार के दौरान चांदी एक बार तो प्रति किलो 2 लाख रुपये से नीचे आ गई थी। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद सोने की कीमत में 18 फीसदी गिरावट आ चुकी है। इस दौरान सोने का मार्केट कैप 7.3 ट्रिलियन डॉलर कम हो चुका है। पिछले हफ्ते सोने की कीमत में भारी गिरावट आई। यह 1983 के बाद सोने के लिए सबसे खराब हफ्ता रहा।

युद्ध के कारण कच्चा तेल हुआ महंगा

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव पैदा हो गया है। इस कारण तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें 44 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। भारत अपनी 85% तेल जरूरत आयात करता है। ऐसे में उसके लिए यह बड़ा झटका है। भारत का क्रूड ऑयल बास्केट 155 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। अनुमान है कि कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल करीब 12 अरब डॉलर बढ़ जाता है।