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मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली की दरों में औसत 3.46% की बढ़ोतरी हुई है। दरअसल बिजली कंपनी द्वारा 1900 करोड़ रुपए की बिजली चोरी होना बताया गया है। इतनी राशि का भार उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले बिलों में वसूला जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक के सामने याचिका दायर की थी।

इस पर आयोग द्वारा की गई सुनवाई में एक्सपर्ट एवं बिजली कंपनी के रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल ने बिजली चोरी और बिजली खरीदी की लागत के गणित पर आपत्ति जताई थी। अग्रवाल ने अब सोमवार को मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर बाकायदा यह गणित समझाया है।

अग्रवाल ने बताया कि बिजली कंपनी का तर्क यह है कि औसत बिजली खरीदी लागत 2.14 रुपए प्रति यूनिट है। इसके 1525 करोड़ रुपए का भार हम झेल लेंगे। इस पर आयोग ने 2.31 रु प्रति यूनिट के हिसाब 1643 करोड़ मंजूर कर दिए।

मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में अग्रवाल ने यह बताया कि बिजली कंपनी की 3564 करोड़ रुपए का भार खुद झेलना था। ऐसा होता तो बिजली दरें बढ़ाने के बजाय कम की जा सकती है। वास्तविकता यह है कि 1928 करोड़ रुपए के अंतर को पाटने के लिए 3.46 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। आयोग ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।