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वॉशिंगटन: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने चीन का मुकाबला करने के लिए दक्षिण एशिया में भारत को एक जरूरी सहयोगी बताया है। सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर ने बुधवार को हाउस की विदेश मामलों की कमेटी की दक्षिण और मध्य एशिया पर सब-कमेटी से यह कहा है। जब उनसे भारत को लेकर पूछा गया कि वह चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करने में अमेरिका की कैसे मदद करेगा। इस पर कपूर ने कहा कि एक ऐसा भारत जो आजादी से विकास कर सके, अपने दम पर खड़ा हो सके, वह अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि एक मजबूत भारत इंडो-पैसिफिक में चीन की एक बड़ी ताकत बनने की क्षमता को कम करता है।

रूसी तेल पर भी दिया बयान

चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल पर अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का आर्थिक विकास और स्वतंत्र मिलिट्री डेवलपमेंट चीन का अपना असर बढ़ाने की काबिलियत को रोकता है। उन्होंने बताया कि भारत रूस से तेल खरीदना कम कर रहा है और अलग-अलग तरह का तेल खरीद रहा है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली के अमेरिकी तेल खरीदने की अच्छी संभावना है।]

पाकिस्तान को बताया जरूरी पार्टनर

ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को भी अमेरिका का एक जरूरी पार्टनर बताया है। कपूर ने हाउस कमेटी के सामने क्षेत्रीय एंगेजमेंट में पाकिस्तान की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने सब-कमेटी को बताया कि अहम पाकिस्तान के साथ मिलकर उसके जरूरी मिनरल रिसोर्स की क्षमता को समझने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा और कृषि में पाकिस्तान के साथ व्यापार बढ़ रहा है। कपूर ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा, हमारा काउंटर टेररिज्म सहयोग पाकिस्तान को अंदरूनी सुरक्षा खतरों से लड़ने में मदद करता है।इस दौरान अमेरिकी सांसदों ने कपूर की पिछले किताब में पाकिस्तान में आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच का भी जिक्र किया। इसके साथ ही पूछा कि क्या दक्षिण और मध्य एशिया में मौजूद चरमपंथी अमेरिका में शरिया ला रहे थे। इस पर कपूर ने जवाब दिया कि संगठित रूप से ऐसे समूहों के अमेरिका में काम करने की जानकारी नहीं थी। लेकिन चेतावनी दी कि अलग-अलग सदस्य कहीं भी मौजूद हो सकते हैं।

भारत-पाकिस्तान युद्ध में ट्रंप की भूमिका की निंदा

इस दौरान कमेटी की डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य सिडनी कैमलेजर -डोव ने भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले साल मई में हुए सैन्य टकराव का मुद्दा उठाया और इसमें राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका को लेकर निंदा की। उन्होंने कहा कि इस घटना से अमेरिकी डिप्लोमेसी की जरूरी भूमिका को और मजबूत होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप की सीजफायर का क्रेडिट लेने की जिद और कश्मीर विवाद में मध्यस्थता की पेशकश ने इस पर पानी फेर दिया।